रोग और उपचार

Ayurveda: पीपल के पत्तों से दूर होती है अनेकों बीमारियां, ऐसे करें सेवन

Ayurveda: आयुर्वेद में पीपल के पेड़ को औषधियों का खजाना माना गया है। यह पेड़ कई प्रकार के रोगों के उपचार में लाभकारी है।पीपल की डाली की दातुन करने व कोमल पत्तों को चबाने से मुंह में छाले, दुर्गध, पायरिया व मसूढ़ों की सूजन में लाभ होता है।
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Updated: 29 Jun 2021, 4:53 PM IST
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Ayurveda: आयुर्वेद में पीपल के पेड़ को औषधियों का खजाना माना गया है। यह पेड़ कई प्रकार के रोगों के उपचार में लाभकारी है।पीपल की डाली की दातुन करने व कोमल पत्तों को चबाने से मुंह में छाले, दुर्गध, पायरिया व मसूढ़ों की सूजन में लाभ होता है। इसके अलावा दस्त या दस्त में खून आने पर इसके पत्तों के नर्म डंठल को साबुत धनिया व शक्कर के साथ चबाते हुुए धीरे-धीरे रस लेने से आराम मिलता है।

5-7 हरे पत्तों को 250 मिलिलीटर पानी के साथ पीस लें। इसमें 1 चम्मच पिसी मिश्री मिलाकर सुबह-शाम लेने से पेशाब (यूरिन) में संक्रमण की समस्या दूर होती है। पीपल व लसोड़े के 5-7 पत्ते एक साथ लेकर 250 मिलिलीटर पानी में पीस लें। इसमें थोड़ा नमक मिलाकर सुबह-शाम 10 दिनों तक लेने से लिवर संबंधी रोगों मे लाभ होता है।

लगभग 10 पीपल की कोमल पत्तियों को 400 ग्राम दूध के साथ अच्छी तरह से उबाल लें। इसे छानकर इसमें स्वादानुसार पिसी हुई मिश्री मिलाकर सुबह नाश्ते के समय पीने से याददाश्त में कमी व तनाव जैसी समस्याएं दूर होती हैं।

अगर आपके दांतों में कीड़े लगे हैं तो आप पीपल की एक कच्ची जड़ लीजिए फिर उसे अपने दांतों पर रगड़िए। ऐसा करने से आपके दांतों में लगे कीड़े हट जाएंगे। बहुत से लोग अपना मुंह खोलने में हिचकते हैं क्योंकि उनके मुंह से बदबू आती है। अगर आप भी इन लोगों में शामिल होते हैं तो चिंता करने की जरूरत नहीं है, आपको बस पीपल का पत्ता खाना है। पीपल का पत्ता खाने से आपके मुंह से आने वाली बदबू हमेशा के लिए चली जाएगी।

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अगर आपको भी नकसीर की समस्या है तो आप पीपल की पत्तियां खाइए या उसकी पत्तियों को पानी में उबालिए। पानी में उबालने के बाद पतियों को अलग कर दीजिए और पानी पी लीजिए। ज्यादा गर्मी के वजह से नकसीर की समस्या आम होती है। ऐसा करने से आपको पल भर में इस समस्या से छुटकारा मिलेगा।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
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