डूंगरपुर

Suposhan Nutri Kit : ‘किट अभी आई नहीं है’, डूंगरपुर में 5 माह से आंगनबाड़ी केंद्रों पर आपूर्ति ठप, जिम्मेदार खामोश

Suposhan Nutri Kit : पांच महीनों से डूंगरपुर जिले के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों पर सुपोषण न्यूट्री किट की आपूर्ति ठप है। इससे गर्भवती महिलाओं को पोषण सामग्री के लिए भटकना पड़ रहा है।
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Dungarpur 5 months Anganwadi centres Suposhan Nutri Kit Supply stalled
Suposhan Nutri Kit : साबला आंगनबाड़ी केंद्र। फाइल फोटो पत्रिका

Suposhan Nutri Kit : राजस्थान सरकार भले ही गर्भवती महिलाओं और गर्भ में पल रहे शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण को लेकर बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर रही हो, लेकिन हकीकत में जिम्मेदारों की लापरवाही इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से 5 से 9 माह की गर्भवती माताओं को आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से निःशुल्क "सुपोषण न्यूट्री पोषण किट" उपलब्ध कराने की योजना कागजों तक सीमित होकर रह गई है। हालत यह है कि पांच महीनों से जिलेभर के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों पर सुपोषण न्यूट्री किट की आपूर्ति ठप पड़ी है। इससे गर्भवती महिलाओं को प्रसव का समय पूरा होने या नजदीक आने के बावजूद पोषण सामग्री के लिए भटकना पड़ रहा है।

हर माह उम्मीद लेकर केंद्र पहुंचने वाली माताओं और उनके परिजनों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। मजबूरन उन्हें केंद्रों की चौखट चूमनी पड़ रही है। इधर, हर महीने गर्भवती माताओं का पंजीकरण भी बढ़ रहा है। इस कारण सबसे अधिक परेशानी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उठानी पड़ रही है। हर महीने गर्भवती महिलाओं के सवालों के बीच कार्यकर्ताओं को एक ही जवाब देना पड़ रहा है 'किट अभी आई नहीं है।' इससे कार्यकर्ताओं की स्थिति भी असहज बनी हुई है।

जनवरी में किया था वितरण

पूर्व में विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते ठेकेदार की ओर से जनवरी माह में आंगनवाड़ी केंद्रों पर सुपोषण न्यूट्री पैकेटों का आधा-अधूरा वितरण किया था। इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। फिलहाल केंद्रों पर गर्भवती माताओं के पंजीकरण में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बताया जा रहा है कि पांच से नौ माह की गर्भवती माताओं को यह किट देने का प्रावधान है। ऐसे में पिछले पांच महीनों से सुपोषण न्यूट्री पैकेटों का वितरण नहीं होने के दौरान कई माताओं का प्रसव भी हो चुका है।

डूंगरपुर में ब्लॉक अध्यक्ष कमला मीणा ने बताया कि पूर्व में केंद्रों पर गर्भवती माताओं के पंजीकरण की तुलना में पैकेट कम वितरित हुए थे। ऐसे में काफी परेशानी हुई। अब पिछले पांच महीनों से पैकेटों की सप्लाई नहीं होने के कारण गर्भवती माताओं को केवल सप्लाई आने पर किट उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया जा रहा है। वहीं, महिला सुपरवाइजर गंगा मीणा ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती माताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुपोषण पैकेटों की आपूर्ति होने से परेशानियां हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश स्तर का मामला है। पैकेट मिलने के बाद ही उनका वितरण किया जाएगा। नहीं

पहले आधी-अधूरी आपूर्ति ने बढ़ाई थी मुश्किलें

जानकारी के अनुसार, विभाग की ओर से जनवरी-फरवरी माह में भी आधे-अधूरे तरीके से सुपोषण न्यूटी किट के पैकेट भेजे गए थे। कई आंगनबाडी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं की संख्या के मुकाबले बेहद कम किट पहुंची, जिससे चयन और वितरण को लेकर विवाद की स्थिति तक बन गई। कार्यकर्ताओं को महिलाओं और उनके परिजनों की नाराजगी का सामना करना पड़ा।

एक और सरकार मातृ एवं शिशु कुपोषण रोकने, सुरक्षित मातृत्व और सुपोषित राजस्थान के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या गर्भवती माताओं का पोषण सिर्फ फाइलों और भाषणों तक सीमित रह गया है? जब प्रसव के अंतिम महीनों में महिलाओं को अतिरिक्त पोषण की सबसे अधिक जरूरत होती है, तब योजना की सामग्री का ही गायब होना जिम्मेदार अधिकारियों और सप्लाई ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

क्या है मुख्यमंत्री सुपोषण न्यूट्री किट में?

जिले में वितरित्त की जाने वाली मुख्यमंत्री सुपोषण न्यूट्री किट में पोषण के लिहाज से निर्धारित सामग्री शामिल की गई है। इसमें
खजूर 500 ग्राम
भुना चना 500 ग्राम
मूंगफली 500 ग्राम
गुड़ 500 ग्राम
मखाना 100 ग्राम
घी 1 किलो
कुल मात्रा 3 किलो 100 ग्राम।

जिम्मेदारों की चुप्पी, माताओं की चिंता बढ़ी

चार माह से किट नहीं पहुंचने के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही। सवाल यह है कि आखिर गर्भवती माताओं के हिस्से का पोषण किसकी लापरवाही की भेंट चढ़ रहा है? यदि समय रहते आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर आने से पहले ही दम तोड़ती नजर आएगी।

Updated on:
27 Jun 2026 02:01 pm
Published on:
27 Jun 2026 01:58 pm