
Dungarpur Shilpgram : डूंगरपुर नगर परिषद की ओर से शिल्पग्राम बनाने के सपने को साकार करने का कार्य शुरू कर दिया है। शहर के नजदीक गुमानपुरा में लॉ कॉलेज के पीछे 8.25 हेक्टेयर जमीन पर निर्माण कार्य शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बेणेश्वर धाम दौरे के दौरान इसका आधिकारिक शिलान्यास हो चुका है। पर्यटन विभाग की ओर से करीब 9.8 करोड़ की लागत से यह सबसे बड़ा शिल्पग्राम बनेगा। इससे शहर में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा ।
दरअसल, नगर परिषद की वर्ष 2021-22 में भाजपा बोर्ड की पहली बैठक में उदयपुर की तर्ज पर डूंगरपुर में भी शिल्पग्राम बनाने का निर्णय लिया गया था। निवर्तमान सभापति अमृत कलासुआ की ओर से शिल्पग्राम निर्माण का प्रस्ताव रखने के बाद शहर के 40 पार्षदों ने स्वीकृति दी थी।
इसके बाद से नगर परिषद शिल्पग्राम बनाने के लिए लगातार प्रयासरत रही। लंबे इंतजार के बाद भाजपा शासन में शिल्पग्राम के लिए जमीन का आवंटन दिसंबर 2025 में हुआ। इसके बाद सभापति अमृत कलासुआ, उपसभापति सुदर्शन जैन और अन्य पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से बजट घोषणा में शिल्पग्राम को शामिल करने की मांग की थी।
इसके बाद मुख्यमंत्री की ओर से शिल्पग्राम के लिए प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति जारी करते हुए 9.8 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया गया। यह कार्य पर्यटन विभाग के माध्यम से राजस्थान पर्यटन विकास निगम लिमिटेड द्वारा कराया जाएगा।
डूंगरपुर शहर के नजदीक गुमानपुरा में लॉ कॉलेज के पीछे शिल्पग्राम का निर्माण किया जाएगा। यहां गार्ड रूम के साथ मुख्य प्रवेश द्वार, टिकट काउंटर, वेटिंग कम मल्टीपर्पज हॉल, प्रशासनिक भवन, शिल्प दुकानें एवं कियोस्क, पारंपरिक आवास एवं कार्यशाला इकाइयां, ओपन फूड प्लाजा और जन सुविधाएं जैसे टॉयलेट ब्लॉक, वाटर प्यूरिफायर सहित वाटर कूलर, पर्यटकों के बैठने के लिए बेंच, सूचनात्मक साइनेज और कूड़ेदान होंगे।
इसके अलावा अंडरग्राउंड वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, भूमिगत टैंक और विद्युत संबंधी कार्य भी किए जाएंगे। इस कार्य को 14 मई 2027 तक पूर्ण कर नगर परिषद को सुपुर्द किया जाएगा।
निर्वतमान सभापति अमृत कलासुआ ने बताया कि डूंगरपुर जिले में शिल्पग्राम के माध्यम से स्थानीय कलाकारों को बड़ा मंच मिलेगा। इसमें प्रमुख रूप से आदिवासी संस्कृति, पत्थर शिल्पकला और बांस कला को स्थान दिया जाएगा। जनजाति बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण यहां की आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी, जिसमें झोपडिय़ां, खान-पान में उपयोगी सामग्री, घरेलू सामान, पहनावा, तीर-कमान, जड़ी-बूटियां, कृषि औजार, पारंपरिक वाद्य यंत्र और आभूषण शामिल हैं।
इसके अलावा यहां के गेर नृत्य को भी मंच मिलेगा। सोमपुरा समाज की शिल्पकला को भी अवसर मिलेगा, जिससे वे अपने हुनर को आगे बढ़ा सकेंगे। वहीं बांसड समाज द्वारा तैयार किए जाने वाले बांस उत्पादों को भी प्रदर्शनी और बिक्री के लिए स्थान दिया जाएगा।
शिल्पग्राम निर्माण के लिए पर्यटन विभाग की कार्यकारी एजेंसी के माध्यम से शिलान्यास कराया गया है। अगले वर्ष तक कार्य पूर्ण होने के बाद इसे नगर परिषद को सौंप दिया जाएगा। शिल्पग्राम स्थानीय कलाकारों को मंच देने का अच्छा विकल्प होगा। वहीं देशी और विदेशी पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
प्रकाश डूडी, आयुक्त, नगर परिषद डूंगरपुर