
डूंगरपुर/सागवाड़ा। डूंगरपुर के ठाकरडा स्थित नवोदय विद्यालय में स्पोर्ट्स टूर्नामेंट के अभ्यास के दौरान उस समय हड़कंप मच गया जब गलती से धनुष से छूटा तीर एक विद्यार्थी के सीने में जा घुसा। तीर विकास ननोमा (13) की छाती की हड्डी और झिल्ली को चीरता हुआ सीधे दिल तक पहुंच गया। दिल से खून बहने और उसके आसपास रक्त जमा होने से पीड़ित की जान पर बन आई। गंभीर हालत में उसको उदयपुर के एमबी अस्पताल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने आधी रात 4 घंटे तक जटिल इमरजेंसी सर्जरी कर उसकी जान बचा ली।
उदयपुर के एमबी अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचते ही डॉ. विष्णु प्रताप ने विद्यार्थी का प्राथमिक उपचार किया। रेडियो डायग्नोसिस विभाग के आचार्य डॉ. कुशल गहलोत ने रेडियोलॉजिकल जांच की। रात में ही सीटी स्कैन कराया गया। जांच में सामने आया तीर स्टर्नम (छाती की हड्डी) और पेरिकार्डियम को पार कर हृदय के दाहिने वेंट्रिकल तक पहुंच गया था। चोट के कारण हृदय से रक्तस्राव हो रहा था और उसके आसपास खून जमा होने से कार्डियक टैम्पोनैड की स्थिति बन गई थी। इसमें हृदय पर दबाव बढ़ने से उसकी रक्त पंप करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है और समय पर उपचार नहीं मिलने पर जान का खतरा रहता है।
मरीज की गंभीर स्थिति देखते हुए कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के वरिष्ठ आचार्य एवं विभागाध्यक्ष डॉ. विनय नैथानी की टीम ने तत्काल ऑपरेशन का निर्णय किया। मंगलवार रात करीब 11.30 बजे ऑपरेशन शुरू हुआ और देर रात 3.30 बजे पूरा हुआ। दाहिनी ओर थोराकोटॉमी कर छाती खोली गई। इसके बाद पेरिकार्डियम खोलकर हृदय पर बने दबाव को कम किया गया। चिकित्सकों ने सावधानी से तीर के सिरे को बाहर निकाला और दाहिने वेंट्रिकल में हुए घाव को ठीक कर रक्तस्त्राव रोका। सर्जरी के दौरान मरीज को चार यूनिट रक्त चढ़ा ।
ऑपरेशन डॉ. विनय नैथानी ने किया इसमें डॉ. नरेश और डॉ. जसवंत ने सहयोग किया। एनेस्थीसिया डॉ. संदीप शर्मा और डॉ. अंजुरी गोयल ने दिया, जबकि नर्सिंग टीम में दुर्गा मीणा ने सहयोग किया। आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक डॉ. राहुल जैन और एमबी हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. आर.एल. सुमन भी मरीज की स्थिति पर नजरू रखे रहे हैं। विकास के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है।
दर्द और घबराहट में विकास ने तीर को खुद ही हाथ से खींचकर निकाल लिया, लेकिन तीर का नुकीला लोहे का अगला हिस्सा उसके सीने के अंदर ही फंसा रह गया। अत्यधिक खून बहता देख वहां मौजूद साथी छात्र और कोच घबरा गए। प्रधानाचार्य अमित कुमार मीणा के निर्देश पर स्टाफ ने छात्र को सागवाड़ा के पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय अस्पताल पहुंचाया। यहां एक्स-रे में सीने के अंदर लोहे का टुकड़ा फंसे होने की पुष्टि हुई। जिसके बाद रात 9 बजे एंबुलेंस के जरिए छात्र को उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया।
उधर, हादसे के बाद मामले की गंभीरता को भांपते हुए डूंगरपुर जिला कलक्टर देशलदान और उपखण्ड अधिकारी सुबोधसिंह चारण ने उदयपुर जिला प्रशासन और मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों को अलर्ट कर दिया था। इसके चलते उदयपुर पहुंचते ही अस्पताल में सर्जरी और ट्रॉमा टीम तैयार मिली। उदयपुर पहुंचते ही डॉक्टरों ने जांच के बाद बुधवार तड़के तक चले जटिल ऑपरेशन में छात्र के सीने से तीर का नुकीला लोहे का टुकड़ा बाहर निकाल लिया। ऑपरेशन के दौरान विकास को 4 यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ी। जिस पर शिक्षक गजेंद्र गहलोत, ब्रजमोहन मीणा, चालक विक्रम मीणा सहित चार जनों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया।
-कोच की निगरानी में अभ्यास।
-तीर चलाने से पहले निशाने के पीछे का क्षेत्र जांच लें।
-सुनिश्चित करें कि लक्ष्य के पीछे पर्याप्त बैकस्टॉप हो।
-तीर चलाने से पहले सामने और आसपास कोई व्यक्ति न हो, यह सुनिश्चित करें।
-तीर निकालने के लिए तभी आगे जाएं, जब सभी तीरंदाजों को अभ्यास रोकने का संकेत मिल जाए।