
Dungarpur: परिजनों को समझाते पुलिस और डाक्टर (फोटो-पत्रिका)
डूंगरपुर। जिला अस्पताल के मातृ एवं शिशु विभाग में मृत बच्चे को जन्म देने के करीब 24 घंटे के बाद गुरुवार सुबह प्रसूता की मौत हो गई। इससे आक्रोशित परिजनों ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए करीब तीन घंटे तक अस्पताल में हंगामा किया। इस दौरान परिजनों ने शव को मोर्चरी में ले जाने से रोका। आरोप है कि जूनियर डॉक्टर के साथ धक्का-मुक्की भी की। बाद में कोतवाली थाने से पुलिस जाप्ता पहुंचने और कड़ी मशक्कत व समझाइश के बाद शव को मोर्चरी में शिफ्ट कराया जा सका। इधर, मामले में चिकित्सा विभाग ने पांच सदस्यीय टीम गठित कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, उदयपुर जिले के सुलई खेरवाड़ा निवासी ललिता (19 ) पत्नी नितेश मीणा अपने गर्भावस्था के दौरान अपने पीहर ऋषभदेव पंचायत समिति के पादेडी (गरासियाफला) में रह रही थी। उसका नियमित इलाज खेरवाड़ा के निजी अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष प्रजापति के यहां चल रहा था। 5 अगस्त को जब परिजन उसे डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे, तो स्थिति गंभीर होने पर डॉक्टर ने उसे तुरंत डूंगरपुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल में भर्ती करने के बाद दोपहर करीब 3 बजे प्रसूता की नॉर्मल डिलीवरी कराई गई, जिसमें मृत बच्चा पैदा हुआ। डिलीवरी के बाद देर शाम महिला को लेबर रूम से वार्ड में शिफ्ट किया था।
सुबह करीब 10 बजे अचानक ललिता की तबीयत फिर से बिगड़ गई। चिकित्सक शिखा अग्रवाल का तर्क है कि जब महिला का इलाज शुरू ही कर रहे थे कि परिजन लापरवाही का आरोप लगाते हुए उसे जबरन व्हीलचेयर पर बैठाकर बाहर ले आए। जिसके बाद एमसीएच अस्पताल के गेट पर पहुंचते ही प्रसूता ने दम तोड़ दिया। इसके बाद परिजन शव को दोबारा अंदर ले गए, जहां डॉक्टरों ने सीपीआर देकर उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
मौत से गुस्साए परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। अस्पताल स्टाफ ने अन्य मरीजों की परेशानी को देखते हुए शव को मोर्चरी में भिजवाने का प्रयास किया। आरोप है कि परिजनों ने स्टाफ से धक्का-मुक्की की और शव को खींचकर वापस एमसीएच बिल्डिंग के अंदर लेबर रूम में ले गए। सूचना पर कोतवाली थाने से जाप्ता पहुंचा और लोगों को बाहर निकाला। पुलिस की उपस्थिति में जब शव को मोर्चरी ले जाया जाने लगा, तब भी परिजन स्ट्रेचर के पहिए पकड़कर बैठ गए। आखिरकार पुलिस ने समझाइश के बाद शव को मोर्चरी में शिफ्ट किया।
मृतका के पति नितेश निवासी सुलई खेरवाड़ा एवं परिजनों का आरोप है कि जिला अस्पताल पहुंचने के एक घंटे तक प्रसूता का इलाज शुरू नहीं किया गया, जिससे शरीर में जहर फैल गया। खेरवाड़ा के निजी डॉक्टर आशीष प्रजापति के फोन करने और दबाव बनाने पर लेबर रूम में ले जाया गया था। परिजनों का आरोप है कि डिलीवरी के समय अत्यधिक ब्लीडिंग होने के बावजूद डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने ध्यान नहीं दिया। इस पर उन्होंने फिर से डॉ. आशीष को फोन किया, जिसके बाद डॉक्टर ने शाम को लेबर रूम में आकर इलाज किया था।
मृतका के पति ने बताया कि वार्ड में शिफ्ट करने के बाद रातभर महिला की तबीयत खराब रही और नर्सिंग स्टाफ को इसकी जानकारी भी दी, लेकिन न तो उसे आईसीयू में शिफ्ट किया गया और न ही कोई इंजेक्शन या दवा दी गई। परिजनों ने मृत बच्चे का जहर फैलने से मौत होने का आरोप लगाते हुए लापरवाह कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मामले में जूनियर डॉ. अभिधा पंचाल ने परिजनों पर मारपीट का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि लेबर रूम में स्ट्रेचर को साइड में करने के दौरान आक्रोशित परिजनों ने हंगामा करते हुए उन्हें मुक्का मारा। इसके अलावा अन्य स्टाफ के साथ भी हाथापाई और धक्का-मुक्की की गई। इस घटना को लेकर अस्पताल प्रबंधन को लिखित शिकायत दी है।
महिला की बुधवार को नॉर्मल डिलीवरी हो चुकी थी। उसका हिमोग्लोबिन भी 9 ग्राम से ज्यादा था। बच्चे के गर्भ में मौत होने की जानकारी परिजन को पहले से थी। नॉर्मल डिलीवरी के बाद तबीयत ठीक होने पर वार्ड में शिफ्ट किया गया था। नियमानुसार उसका इलाज चल रहा था। सुबह महिला की मौत हुई। परिजनों की शिकायत पर पांच सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। जो जांच करेगी। वहीं स्टॉफ और एक जूनियर डाक्टर से मारपीट को लेकर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। -डॉ. कौस्तुभसिंह, उप अधीक्षक, जिला अस्पताल डूंगरपुर।
Updated on:
06 Aug 2026 05:46 pm
Published on:
06 Aug 2026 05:46 pm
