
राजस्थान के डूंगरपुर जिले में 12 साल पहले एक युवक की मौत के बाद उपजे विवाद में मां-बेटी को घर, गांव और समाज के बहिष्कार के मामले में पुलिस की समझाइश के बाद पुन: सम्मिलित होने का रास्ता साफ हो गया।
रामसागड़ा पुलिस थाने की ओर से 17 गांवों के पदाधिकारियों और पीड़ित मां-बेटी के मध्य समझाइश की गई। जिसमें समाज के पदाधिकारियों ने मां-बेटी को समाज का अभिन्न अंग मानते हुए उसे पुन: सम्मिलित किया गया।
सभी पक्षों के बीच चर्चा के बाद लिखित सहमति बनी कि संबंधित परिवार को अब किसी भी प्रकार की सामाजिक पाबंदी नही रहेगी तथा भविष्य में समाज के व्यक्तिगत और सार्वजनिक आयोजनों में उन्हें शामिल होने से रोका नही जाएगा।
पीड़िता ने रामसागड़ा थाना, जिला कलक्टर और पुलिस अधीक्षक को रिपोर्ट देते हुए बताया था कि 10 अगस्त 2015 को उसके भाई के दो दोस्त जन्मदिन मनाने के लिए गए थे। तीनों दोस्त जन्मदिन मनाकर रातभर वापस घर नहीं लौटे। अगले दिन 11 अगस्त 2015 को पीड़िता के भाई की मोटरसाइकिल पास के एक गांव में मिली थी। सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बाइक जब्त कर पास में बिना मुंडेर के कुएं से दोनों दोस्तों के शव बरामद किए थे।
मृतक के परिजनों के आरोप के आधार पर तीसरे दोस्त को गिरफ्तार किया था। इसी घटना के बाद मृतक के परिजनों ने दबाव में गांव के मुखिया ने आरोपी की बहन, मां और पिता को समाज के बहिष्कृत कर दिया था। घटना के तीन माह बाद मृतकों के परिजनों ने 17 गांवों की पूरी समाज की बैठक में पूरे परिवार और मामा के घर को भी बहिष्कृत कर दिया था।
इसी सदमे में आरोपी के पिता का निधन हो गया। वहीं मां और बेटी के साथ मारपीट कर गांव से निकाल दिया गया था। मां व बेटी दिल्ली में रहकर अपना गुजारा कर रही थी। पीड़िता ने 17 जून को रामसागड़ा थाने में लिखित शिकायत दी थी।
'राजस्थान पत्रिका' ने 31 जुलाई को खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद रामसागड़ा पुलिस ने समाज के पदाधिकारियों को नोटिस भेजकर एकत्रित किया। जहां पर समझाइश के बाद मां और बेटी को सम्मान के साथ समाज में शामिल किया। सभी के मध्य लिखित समझौता हुआ।