अल नीनो-ला नीना के चक्र से बदल रहा मानसून का मिजाज पिछले 10 वर्षों के दौरान यह चौथी बार है, जब जुलाई माह में 250 एमएम से कम बारिश दर्ज हुई है। मानसून की इस अनिश्चितता के पीछे वैश्विक मौसमी प्रणालियों, विशेषकर अल नीनो और ला नीना का बड़ा प्रभाव माना जाता है। सामान्यत: अल नीनो सक्रिय होने पर अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे राजस्थान सहित उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से कम बारिश की संभावना बढ़ जाती है। इसके विपरीत ला नीना के दौरान मानसून अपेक्षाकृत मजबूत रहता है। हालांकि, इन प्रणालियों का प्रभाव हर वर्ष एक जैसा नहीं होता, लेकिन इनका असर अक्सर दो से तीन वर्षों तक मानसून के पैटर्न पर दिखाई देता है। यही कारण है कि कुछ वर्षों में लगातार अच्छी बारिश होती है, जबकि कुछ वर्षों में बारिश सामान्य से कम रहती है।