
Rajasthan Monsoon Weather - File PIC
Dungarpur Rain News: राजस्थान में जुलाई माह में कम हुई बारिश ने एक बार फिर मानसून के बदलते स्वरूप को सामने ला दिया है। कभी झमाझम बारिश से बांध और जलाशय लबालब हो जाते हैं, तो कभी बादलों की बेरुखी से खेतों में नमी तक कम पड़ जाती है। इस बार 1 से 31 जुलाई तक प्रदेश के डूंगरपुर जिले जिले में औसतन 188 एमएम बारिश दर्ज की गई, जबकि पिछले साल जुलाई में 409 एमएम बारिश हुई थी, यानी इस बार 221 एमएम कम वर्षा हुई। पिछले दस वर्षों के आंकड़ों के अनुसार जुलाई माह में पहली बार बारिश 188 एमएम दर्ज हुई है। पांच वर्षों में औसत 300 एमएम से अधिक और दो वर्षों में 250 एमएम से अधिक बारिश दर्ज की गई।
वर्ष 2017 में जुलाई में सर्वाधिक 488 एमएम बारिश का रिकॉर्ड बना था, जो अब तक कायम है। वहीं 2020 में सबसे कम 218 एमएम और 2021 में 221 एमएम बारिश दर्ज की गई थी।
बारिश के आंकड़े बताते हैं कि जिले में मानसून का पैटर्न लगातार बदल रहा है। बारिश अब नियमित रहने के बजाय उतार-चढ़ाव वाली हो गई है। इसका असर खरीफ फसलों, जलाशयों, भूजल स्तर और पेयजल व्यवस्था पर पड़ रहा है।
| बांध | क्षमता (मीटर) | वर्तमान स्तर (मीटर) |
|---|---|---|
| सोमकमला | 13.00 | 10.50 |
| लोडेश्वर | 8.93 | 6.50 |
| वात्रक | 4.72 | 1.00 |
| भादर | 5.35 | 1.90 |
| आकरसोल का नाका | 9.00 | 3.30 |
| मारगीया | 8.85 | 5.50 |
| मेवाड़ा | 7.80 | 3.30 |
| अमरपुरा | 6.80 | 4.30 |
| बाबा की बार | 5.40 | 0.60 |
| सूरी तालाब | 5.49 | 0.50 |
| गडा झुमजी | 3.50 | BSL |
| टामटिया | 3.20 | 0.60 |
| पुंजपुर | 3.82 | 2.70 |
| बोडीगामा | 4.50 | 3.05 |
| काठडी | 8.50 | 6.00 |
| गलियाना | 4.60 | 2.90 |
| गजपुर | 9.75 | 2.30 |
| भै का नाका | 10.07 | 0.55 |
| घोडियों का नाका | 8.50 | 1.90 |
| करावाड़ा तालाब | 2.44 | 0.70 |
| वरदोल का नाका | 6.00 | 0.60 |
| वारदा | 4.40 | 1.90 |
अल नीनो-ला नीना के चक्र से बदल रहा मानसून का मिजाज पिछले 10 वर्षों के दौरान यह चौथी बार है, जब जुलाई माह में 250 एमएम से कम बारिश दर्ज हुई है। मानसून की इस अनिश्चितता के पीछे वैश्विक मौसमी प्रणालियों, विशेषकर अल नीनो और ला नीना का बड़ा प्रभाव माना जाता है। सामान्यत: अल नीनो सक्रिय होने पर अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे राजस्थान सहित उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से कम बारिश की संभावना बढ़ जाती है। इसके विपरीत ला नीना के दौरान मानसून अपेक्षाकृत मजबूत रहता है। हालांकि, इन प्रणालियों का प्रभाव हर वर्ष एक जैसा नहीं होता, लेकिन इनका असर अक्सर दो से तीन वर्षों तक मानसून के पैटर्न पर दिखाई देता है। यही कारण है कि कुछ वर्षों में लगातार अच्छी बारिश होती है, जबकि कुछ वर्षों में बारिश सामान्य से कम रहती है।
Updated on:
03 Aug 2026 12:19 pm
Published on:
03 Aug 2026 12:19 pm
