डूंगरपुर

FIFA World Cup : जब राजस्थान के डूंगरपुर आई थी इंग्लैंड की फुटबॉल टीम, विशेष मैच देखने उमड़ पड़ा था पूरा जिला

Football Crazy Dungarpur : फीफा वर्ल्ड कप शुरू हो गया है। राजस्थान के डूंगरपुर की बात करे तो यहां के खिलाड़ियों ने क्रिकेट की दीवानगी के बीच फुटबॉल में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।

2 min read
FIFA World Cup England football team in Dungarpur Rajasthan entire district watch match
FIFA World Cup : डूंगरपुर शहर के लक्ष्मण मैदान में फुटबॉल खेल की प्रेक्टिस करते खिलाड़ी, कोच रफीक सिंधी। फोटो पत्रिका

FIFA World Cup Passion in Rajasthan : जब भी फीफा वर्ल्ड कप का शोर गूंजता है, तो ग्रामीण अंचलों में भी फुटबॉल को लेकर एक अलग ही जुनून हिलोरें मारने लगता है। बात जब डूंगरपुर की करे तो यहां के खिलाड़ियों ने क्रिकेट की दीवानगी के बीच फुटबॉल में भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। एक समय था, जब यहां टीम तैयार करने के लिए गांव-गांव से खिलाड़ियों को लाना पड़ता था, प्रतियोगिता के लिए भामाशाह जुटाने पड़ते थे, लेकिन समय के साथ वो दौर अब बीत गया हैं। यहां भी शहर से गांव तक खिलाडि़यों की लंबी फेहरिस्त हैं, जो फुटबॉल को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना चुके है। सीमित संसाधनों से शुरू फुटबॉल का यह खेल लोगों के दिलों में बसा हुआ हैं। फीफा वर्ल्ड कप के बीच पेश है डूंगरपुर जिले की फुटबॉल से जुड़ी खास रिपोर्ट।

जब भामाशाहों की कमी पड़ी, तो गांवों ने संभाली कमान

वर्ष 1980 से 2000 के बीच भामाशाहों की कमी के कारण जिला मुख्यालय पर कोई बड़ा राज्य स्तरीय आयोजन नहीं हो सका, लेकिन इस संकट काल में फुटबॉल शहर की चारदीवारी से निकलकर गांवों की रगों में दौड़ने लगा। ओबरी, डूंका, बेडसा, बांसिया, गंधवापाल, रास्तापाल, बोखलापाल, घुघरा और डोजा जैसे गांवों में मजबूत टीमें तैयार हुईं। इन ग्रामीण युवाओं ने उदयपुर (जावरमाइंस), खेरवाड़ा, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, जयपुर, अजमेर, जोधपुर, पाली और चित्तौड़गढ़ में जाकर कई खिताब अपने नाम किए। इसके बाद वर्ष 2002 में राज्य स्तरीय शिक्षक फुटबॉल और अंडर-14 स्कूल फुटबॉल प्रतियोगिता का सफल आयोजन हुआ।

बेहद सस्ता, इसलिए ग्रामीणों की पहली पसंद

फुटबॉल की लोकप्रियता की एक बड़ी वजह इसका किफायती होना भी है। जहां क्रिकेट खेलने के लिए बैट, बॉल, स्टंप और सुरक्षा सामग्री पर कम से कम 10 हजार रुपए का खर्च आता है, वहीं फुटबॉल का खेल मात्र एक हजार रुपए में एक अच्छी बॉल और जूतों के साथ शुरू हो जाता है। यही कारण है कि फुटबॉल से गांव से शहर तक जुड़ाव बढ़ता गया एवं खिलाड़ी भी तैयार होते गए।

जब डूंगरपुर की धरती पर उतरी इंग्लैंड की टीम

डूंगरपुर में फुटबॉल को केवल आम जनता का ही नहीं, बल्कि राजपरिवार का भी भरपूर प्रोत्साहन मिला। वर्ष 2009 में राजपरिवार की ओर से आयोजित एक विशेष प्रतियोगिता में इंग्लैंड की फुटबॉल टीम डूंगरपुर आई थी। विदेशी खिलाड़ियों और डूंगरपुर के स्थानीय युवाओं के बीच हुआ वह मुकाबला ऐतिहासिक था, जिसे देखने के लिए पूरा जिला उमड़ पड़ा था।

टीम नहीं बन रही थी, साइकिल पर बिठाकर लाए थे खिलाड़ी

डूंगरपुर में फुटबॉल की कहानी करीब 52 साल पुरानी है। जिले में फुटबॉल का अंकुरण राजस्थान टीम के बेस्ट गोलकीपर रहे शार्दुल चौबीसा ने किया था। इसके बाद वर्ष 1976 में सार्वजनिक निर्माण विभाग के इलेक्ट्रिक विंग इंचार्ज खुदा बक्श के प्रयासों से जिले में पहली बार राज्य स्तरीय 'उपाध्याय मेमोरियल फुटबॉल लीग' की शुरुआत हुई। उन दिनों राजस्थान क्रीड़ा परिषद के कोच गोविंदसिंह राठौड़ विशेष रूप से जयपुर से डूंगरपुर आए थे।

राजस्थान फुटबॉल संघ के सीनियर ज्वाइंट सेक्रेट्री रफीक सिंधी बताते हैं कि उस समय टीम बनाने के लिए खिलाड़ियों की कमी थी। तब शार्दुल चौबीसा के मार्गदर्शन में बोखलापाल, रास्तापाल, बेडसा और बांसिया जैसे गांवों से युवाओं को साइकिलों पर बैठाकर डूंगरपुर शहर लाया गया। उनके रहने और खाने की व्यवस्था कर 'टीम डूंगरपुर' तैयार की गई, जिसने लगातार चार साल तक राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में अपनी धाक जमाई। लक्ष्मण मैदान में होने वाले इन मैचों को देखने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ती थी।

Published on:
12 Jun 2026 09:53 am