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Rajasthan Teachers : राजस्थान में पे-प्रोटेक्शन पर उलझा शिक्षा विभाग, प्रदेशभर के सीधी भर्ती से चयनित शिक्षक चिंतित

Rajasthan Teachers : राजस्थान वित्त विभाग की ओर से 2 जून 2026 को जारी परिपत्र के बाद शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों के बीच अपने वेतन संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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Rajasthan Education department direct recruitment teachers pay protection Confusion

Rajasthan Teachers : प्रदेशभर के शिक्षक असमंजस की स्थिति में। फोटो - AI

Rajasthan Teachers : तृतीय श्रेणी शिक्षक पद से सीधी भर्ती के माध्यम से द्वितीय श्रेणी शिक्षक एवं प्राध्यापक पद पर चयनित शिक्षकों की वेतन सुरक्षा (पे-प्रोटेक्शन) को लेकर प्रदेशभर में असमंजस की स्थिति बन गई है। वित्त विभाग की ओर से 2 जून 2026 को जारी परिपत्र के बाद शिक्षा विभाग में कार्यरत ऐसे शिक्षकों के बीच अपने वेतन संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ गई है। वित्त विभाग के हालिया परिपत्र में सार्वजनिक उपक्रमों, स्वायत्तशासी संस्थाओं, स्थानीय निकायों तथा पंचायती राज संस्थाओं के कर्मचारियों को सरकारी सेवक की श्रेणी में नहीं मानते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि ऐसे कार्मिक यदि सीधी भर्ती के माध्यम से सरकारी सेवा में नियुक्त होते हैं तो उन्हें राजस्थान सेवा नियम, 1951 के नियम 24 एवं 26 के अंतर्गत पूर्व पद पर प्राप्त वेतन के संरक्षण का लाभ देय नहीं होगा। इसी प्रावधान की व्याख्या को लेकर शिक्षा विभाग में कार्यरत तृतीय श्रेणी शिक्षकों के बीच संशय की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

जिले के सैकड़ों शिक्षक हो सकते हैं प्रभावित

राजस्थान के शिक्षा निदेशालय के निर्देशों के बाद विभिन्न जिलों में सीधी भर्ती से चयनित शिक्षकों के वेतन निर्धारण मामलों की समीक्षा की जा रही है। डूंगरपुर जिले में भी बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक कार्यरत हैं, जिन्होंने तृतीय श्रेणी शिक्षक पद से सीधी भर्ती के माध्यम से द्वितीय श्रेणी शिक्षक अथवा प्राध्यापक पद प्राप्त किया है।

शिक्षकों को आशंका है कि यदि वित्त विभाग के परिपत्र की उक्त व्याख्या उनके मामलों में लागू की गई तो पूर्व में किए गए वेतन निर्धारण पर आपत्तियां दर्ज हो सकती हैं। इससे न केवल वेतन पुनर्निर्धारण की स्थिति बनेगी, बल्कि कई मामलों में रिकवरी की कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है।

सेवा शर्तें और लाभ अन्य कर्मचारियों के समान

शिक्षकों का कहना है कि तृतीय श्रेणी शिक्षक भले ही पंचायत समिति अथवा जिला परिषद के माध्यम से नियुक्त हुए हों, लेकिन उनकी संपूर्ण सेवा शिक्षा विभाग के अधीन संचालित होती है। उनके वेतन से नियमित रूप से सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) तथा राज्य बीमा (एसआई) की कटौती की जाती है। इसके साथ ही चयनित वेतनमान, एसीपी, एमएसीपी, पदोन्नति संबंधी लाभ तथा सेवानिवृत्ति पर पेंशन सहित सभी वित्तीय एवं सेवा लाभ राज्य सरकार के अन्य शिक्षाकर्मियों और कर्मचारियों की भांति प्रदान किए जाते हैं।

शिक्षकों का तर्क है कि जब सेवा संबंधी सभी नियम और लाभ समान रूप से लागू होते हैं तो सीधी भर्ती के माध्यम से उच्च पद पर चयनित होने पर वेतन सुरक्षा के मामले में अलग व्याख्या किए जाने से भ्रम और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

भ्रम दूर करने के लिए निर्देश आवश्यक

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. ऋषिन चौबीसा तथा जिला उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि तृतीय श्रेणी शिक्षक शिक्षा विभाग की सेवा संरचना का अभिन्न अंग हैं और उन्हें विभाग के अन्य कर्मचारियों की तरह सभी सेवा एवं वित्तीय लाभ प्राप्त होते हैं। ऐसे में सीधी भर्ती के माध्यम से उच्च पदों पर चयनित शिक्षकों की वेतन सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार की अस्पष्टता नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार, वित्त विभाग तथा शिक्षा निदेशालय से इस विषय में स्पष्ट एवं एकरूप दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की हैं।

पूरा प्रकरण कोर्ट में विचाराधीन

राज्य में आरएसआर के नियम के तहत लोकल बॉडी और पंचायतीराज के शिक्षक को पे-प्रोटेक्शन का लाभ देय नहीं होगा। इसको लेकर स्पष्ट गाइडलाइन नहीं आई है। इसके पीछे स्थानीय निधि से भुगतान होने के कारण राज्य सेवक की श्रेणी में नहीं आते है। पूरा प्रकरण कोर्ट में विचाराधीन है। स्पष्ट फैसला आने के बाद शिक्षक को राहत मिल सकती है।
जयेश कलाल लेखाधिकारी समसा डूंगरपुर

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