International Women's Day : डूंगरपुर के माडा गांव की महिला कृषक शांता पटेल बंजर ज़मीन भी 'सोना' उगा रही हैं। शांता पटेल ने जैविक खेती से अपनी और क्षेत्र की तकदीर बदल दी है। वे अमेरिकन ब्रोकली की खेती कर लाखों की कमाई कर रहीं है। वह अब क्षेत्र के दर्जनों परिवारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।
International Women's Day : डूंगरपुर के माडा गांव की महिला कृषक शांता पटेल बंजर ज़मीन भी 'सोना' उगा रही हैं। शांता पटेल ने जैविक खेती से अपनी और क्षेत्र की तकदीर बदल दी है। अमेरिकन ब्रोकली की खेती कर लाखों की कमाई कर रहीं है। वह अब क्षेत्र के दर्जनों परिवारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।
शांता पटेल पिछले 20 वर्षों से खेती में नए प्रयोग कर रही हैं। उनकी उगाई गई अमेरिकन ब्रोकली की मांग राजस्थान से लेकर गुजरात के बाजारों तक है। उनकी सब्जियों की गुणवत्ता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खरीदार साल भर पहले ही एडवांस बुकिंग करा लेते हैं।
उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर तकनीक सही हो, तो खेती घाटे का सौदा नहीं बल्कि एक मुनाफे वाला बिजनेस है।
शांता सिर्फ खुद की प्रगति तक सीमित नहीं हैं। वे हर साल 20 से अधिक महिला किसानों को आधुनिक खेती, सावधानी और मार्केटिंग (विपणन) का प्रशिक्षण देती हैं। वे न केवल तकनीक सिखाती हैं, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर आर्थिक मदद भी करती हैं। उनके मार्गदर्शन में आज कई परिवार ब्रोकली और स्वीट कॉर्न उगाकर अपनी आर्थिक स्थिति सुधार रहे हैं।
12वीं तक शिक्षित शांता पटेल की मेहनत की गूंज दिल्ली तक सुनाई दी है। उन्हें बेस्ट महिला कृषक अवार्ड 'वाइब्रेंट गुजरात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों दिया गया था। उनके संघर्ष और सफलता पर आधे घंटे की विशेष डॉक्यूमेंट्री भी बन चुकी हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत और केंद्रीय कृषि मंत्रियों की ओर से भी उनके कार्य को सराहा जा चुका हैं।
मासिक आय - 50,000 से अधिक।
मुख्य उपज - अमेरिकन ब्रोकली, स्वीट कॉर्न और टमाटर।
रिकॉर्ड - पिछले 3 महीनों में 20 क्विंटल से अधिक ब्रोकली की सप्लाई।
बाजार - उदयपुर संभाग समेत गुजरात के हिम्मतनगर और मोडासा तक भारी मांग।