HPR-ID : राजस्थान के शिक्षा विभाग के शाला दर्पण पोर्टल की तर्ज पर अब चिकित्सा विभाग में भी स्वास्थ्यकर्मियों की डिजिटल मैपिंग शुरू कर दी है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत एचपीआर आईडी बनेगी। सभी को 7 दिन में रजिस्ट्रेशन पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
HPR-ID : राजस्थान शिक्षा विभाग के शाला दर्पण पोर्टल की तर्ज पर अब चिकित्सा विभाग में भी स्वास्थ्यकर्मियों की डिजिटल मैपिंग शुरू कर दी है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टर, नर्सिंगकर्मी और पैरामेडिकल स्टाॅफ का हेल्थ केयर प्रोफेशनल रजिस्ट्री (एचपीआर) में पंजीकरण किया जा रहा है। इसके बाद प्रत्येक चिकित्साकर्मी की एचपीआर आईडी बनेगी। इसमें उसकी योग्यता, पदस्थापन, कार्यक्षेत्र और सेवा रिकॉर्ड की पूरी जानकारी एक ही पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी।
केंद्र सरकार के इस डिजिटल सिस्टम से यह भी पता चल सकेगा कि राजस्थान में कौन-सा हेल्थ प्रोफेशनल कहां कार्यरत है और उसकी सेवाओं का उपयोग किस तरह किया जा रहा है। नेशनल हेल्थ मिशन के निदेशक ने इस संबंध में प्रदेश के सभी 50 जिलों के सीएमएचओ को निर्देश जारी कर पंजीकरण प्रक्रिया को तेज करने को कहा है।
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में कुल 77,941 हेल्थ वर्कर कार्यरत हैं। इनमें से अब तक 49,362 का एचपीआर में पंजीकरण किया जा चुका है, जबकि 28,579 हेल्थ वर्करों का पंजीकरण शेष हैं। इनमें डॉक्टर, नर्सिंगकर्मी, फार्मासिस्ट और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ शामिल हैं।
प्रदेश के 36 जिलों में 70 प्रतिशत से अधिक हेल्थ वर्करों का पंजीकरण पूरा हो चुका है, लेकिन 11 जिले अभी भी लक्ष्य से पीछे चल रहे हैं। जयपुर, उदयपुर, नागौर, झुंझुनूं, डीडवाना-कुचामन, भीलवाड़ा, कोटपुतली-बहरोड़, सीकर, अजमेर, हनुमानगढ़ और प्रतापगढ़ को फिलहाल रेड जोन में रखा गया है।
इसके अलावा कई जिलों में कुछ हेल्थ वर्करों का पंजीकरण लंबित है, जिनमें डूंगरपुर में 7, टोंक 7, बीकानेर 7, बाड़मेर 6, गंगानगर 6, सवाई माधोपुर 6 सहित अन्य जिलों में भी पेंडेंसी बनी हुई है। राज्यभर में अभी भी 412 डॉक्टरों का पंजीकरण नहीं हो पाया है, जिसको लेकर विभाग ने गंभीरता दिखाई है।
नेशनल हेल्थ मिशन के मिशन निदेशक डॉ. अमित यादव ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि 7 दिन के भीतर सभी हेल्थ वर्करों का एचपीआर पंजीकरण कर एचपीआईडी अपडेट कराया जाए। साथ ही इसकी नियमित समीक्षा भी की जाएगी।
1- हेल्थ प्रोफेशनल को राष्ट्रीय स्तर पर मान्य यूनिक आईडी मिलेगी।
2- टेलीमेडिसिन के माध्यम से डॉक्टर दूर-दराज के मरीजों को परामर्श दे सकेंगे।
3- चिकित्सा कर्मियों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा।
4- मरीज ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर डॉक्टरों की जानकारी खोज सकेंगे।
5- लाइसेंस नवीनीकरण, एनओसी और अन्य दस्तावेजों की प्रक्रिया आसान होगी।
6- महामारी या आपात स्थिति में सरकार उपलब्ध स्वास्थ्यकर्मियों की सेवाओं का त्वरित उपयोग कर सकेगी।