
Online Exam Center Scam: दुर्ग जिले के अंडा स्थित शैल देवी महाविद्यालय में ऑनलाइन परीक्षा सेंटर शुरू कराने के नाम पर 12 लाख 39 हजार 483 रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने खुद को HCL टेक्नोलॉजी के परीक्षा सेंटर विभाग से जुड़ा बताया और कॉलेज प्रबंधन को ऑनलाइन परीक्षा सेंटर शुरू करने का प्रस्ताव भेजा। इसके बाद कॉलेज का भरोसा जीतने के लिए एक व्यक्ति को बाकायदा परिसर का मुआयना करने भी भेजा गया। मुआयने के दौरान कॉलेज भवन और परिसर की तस्वीरें ली गईं। इसके बाद ईमेल और ऑनलाइन बैठक के जरिए कॉलेज प्रबंधन से बातचीत होती रही।
समझौते और गोपनीयता से जुड़े दस्तावेज भी भेजे गए। भरोसा बनने के बाद परीक्षा सेंटर के उपकरण, DG सेट, परिवहन और बीमा समेत अलग-अलग कामों के नाम पर कई बार रकम जमा कराई गई। करीब दो महीने तक अलग-अलग किस्तों में पैसे लेने के बाद 15 जून से आरोपियों के मोबाइल नंबर बंद हो गए। ईमेल का जवाब भी आना बंद हो गया। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन को ठगी का शक हुआ। मामले में कॉलेज अध्यक्ष राजन कुमार दुबे की शिकायत पर नेवई पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शैल देवी महाविद्यालय के अध्यक्ष राजन कुमार दुबे ने पुलिस को बताया कि 12 अप्रैल 2025 को कॉलेज के आधिकारिक ईमेल पर HCL टेक्नोलॉजी के परीक्षा सेंटर विभाग के नाम से एक मेल आया था। इसमें कॉलेज में ऑनलाइन परीक्षा सेंटर शुरू करने का प्रस्ताव दिया गया था। मेल में वेदांत कपूर नाम के व्यक्ति का मोबाइल नंबर भी दिया गया था। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन की उससे बातचीत शुरू हुई। आरोपी ने परीक्षा सेंटर से जुड़ी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी और कॉलेज को सेंटर शुरू कराने का भरोसा दिलाया।
प्रस्ताव मिलने के बाद 17 अप्रैल को कॉलेज के ईमेल पर एक समझौता पत्र भेजा गया। इसके अगले दिन कॉलेज के भौतिक निरीक्षण के लिए बुल आई नाम की संस्था से एक व्यक्ति के आने की जानकारी दी गई। 18 अप्रैल को ए.के. साहू नाम का व्यक्ति कॉलेज पहुंचा। उसने कॉलेज की बिल्डिंग और परिसर का मुआयना किया। इस दौरान उसने भवन की तस्वीरें भी लीं।
उसने कॉलेज प्रबंधन को बताया कि निरीक्षण के बाद रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके बाद 1 मई को कॉलेज अध्यक्ष और प्राचार्य कामेश्वर नाथ मिश्रा की Zoom मीटिंग भी हुई। इसमें HCL टेक्नोलॉजी की अनीता नाम की महिला से बातचीत हुई। इसके बाद 5 मई को गोपनीयता और साझेदारी से जुड़े दस्तावेज कॉलेज के ईमेल पर भेजे गए। कॉलेज प्रबंधन ने 8 मई को दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर वापस भेज दिए।
दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कॉलेज से रकम लेने का सिलसिला शुरू हुआ। 19 मई को परीक्षा सेंटर के उपकरणों के लिए 5 लाख 98 हजार 743 रुपए का बिल भेजा गया। इसमें भुगतान के लिए एक निजी फर्म का बैंक खाता दिया गया। कॉलेज प्रबंधन ने 21 मई को अपने बैंक खाते से बताई गई रकम ट्रांसफर कर दी। इसके बाद DG सेट के नाम पर दोबारा रकम मांगी गई। 23 मई को 58.5 KVA DG सेट के लिए 3 लाख 42 हजार 200 रुपए जमा करने को कहा गया। कॉलेज ने 26 मई को यह रकम भी बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दी। इस तरह उपकरण और DG सेट के नाम पर कॉलेज से कुल 9 लाख 40 हजार 943 रुपए लिए जा चुके थे।
इसके बाद भी पैसों की मांग जारी रही। 11 जून को कॉलेज को सामान भेजने और उसके बीमा के नाम पर दो अलग-अलग रकम जमा करने के लिए कहा गया। परिवहन के नाम पर 1 लाख 35 हजार 700 रुपए और बीमा के नाम पर 1 लाख 62 हजार 840 रुपए जमा कराने को कहा गया। कॉलेज प्रबंधन ने 13 जून को दोनों रकम का भुगतान कर दिया। इन दोनों भुगतानों के बाद कॉलेज से कुल 2 लाख 98 हजार 540 रुपए और ले लिए गए। इस तरह पूरे मामले में कॉलेज प्रबंधन द्वारा आरोपियों के बताए अलग-अलग खातों में कुल 12 लाख 39 हजार 483 रुपए जमा किए गए।
शिकायत के अनुसार, 12 अप्रैल से 14 जून तक कॉलेज प्रबंधन की वेदांत कपूर नाम के व्यक्ति से लगातार बातचीत होती रही। इस दौरान ईमेल और फोन के जरिए परीक्षा सेंटर शुरू कराने से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। लेकिन 15 जून के बाद अचानक संबंधित मोबाइल नंबर बंद हो गया। ईमेल करने पर भी कोई जवाब नहीं मिला। लंबे समय तक संपर्क नहीं होने पर कॉलेज प्रबंधन को शक हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी की गई है। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर भी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में दो शिकायत नंबर भी दर्ज किए गए हैं।
मामले की शिकायत मिलने के बाद नेवई पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की है। पुलिस आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, बैंक खातों और रकम के लेन-देन की जानकारी जुटा रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कॉलेज से रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर हुई और उन खातों के पीछे कौन लोग हैं।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि HCL टेक्नोलॉजी के नाम से कॉलेज को भेजे गए ईमेल और दस्तावेज वास्तविक थे या आरोपियों ने फर्जी तरीके से किसी कंपनी का नाम इस्तेमाल किया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। कॉलेज प्रबंधन को उम्मीद है कि बैंक लेन-देन, मोबाइल नंबर और ईमेल से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ठगी करने वालों तक पहुंचा जा सकेगा।