दुर्ग

छत्तीसगढ़ के इस एकता द्वार की क्या खासियत है कि पीएमओ दिल्ली में होगी चर्चा

डिजाइन को लेकर विवाद के कारण 17 साल से अधर में चल रहे एकता द्वार का मामला अब पीएमओ पहुंच गया है।
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Updated: 4 Aug 2018, 9:52 PM IST
Durg patrika
छत्तीसगढ़ के इस एकता द्वार की क्या खासियत है कि पीएमओ दिल्ली में होगी चर्चा

दुर्ग@Patrika. डिजाइन को लेकर विवाद के कारण 17 साल से अधर में चल रहे एकता द्वार का मामला अब पीएमओ पहुंच गया है। दुर्ग के एक आरटीआइ एक्टिविस्ट ने मामले में निगम को जिम्मेदार करार देते हुए इसकी शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने एकता द्वार में प्रस्ताव के अनुसार सभी धर्मों के प्रतीक चिन्ह बनाकर पूरा करने अथवा पूरे निर्माण को हटा देने की मांग उठाई है।

वर्ष 2001 में एकता द्वार का निर्माण शुरू कराया था
नगर निगम द्वारा शहर की धार्मिक सद्भावना को प्रदर्शित करने पुराना बस स्टैंड और सरदार पटेल चौक के बीच स्टेशन रोड पर वर्ष 2001 में एकता द्वार का निर्माण शुरू कराया था। इसमें गुंबद के साथ हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म के प्रतीक चिन्ह बनाया जाना था, लेकिन निर्माण के दौरान गुंबद के धर्म विशेष से जुड़े होने को लेकर विवाद हो गया। इसके बाद निर्माण बंद कर दिया गया।

स्लोगन के अक्षर गायब
एकता द्वारा स्टील से धार्मिक एकजुटता को बढ़ावा देने के मकसद से मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिन्दी हैं हम वतन हैं हिन्दोस्तां हमार स्लोगन भी लिखा गया था। इस स्लोगन के अधिकतर अक्षर अब गायब हो चुके हैं।

अधूरे निर्माण का पूरा भुगतान
एकता द्वार के अधूरे निर्माण के बाद भी ठेकेदार को पूरा भुगतान कर दिए जाने की भी शिकायत पीएमओ से की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि ठेकेदार को निर्माण पूरा करने से पहले ही पूरा भुगतान कर दिया गया है। वहीं आरटीआइ में भी काम का हिसाब नहीं दिया जा रहा।

हो रही धार्मिक भावना आहत
शिकायतकर्ता का कहना है कि निर्माण धार्मिक भाईचारा को बढ़ावा देने के लिए किया गया था, लेकिन अधूरे निर्माण व स्लोगन से लोगों की भावनाएं आहत हो रही हैं। ऐसे में या तो निर्माण पूरा कराया जाना चाहिए या अब धर्म से जुड़े अधूरे निर्माणों के साथ द्वार को भी हटा दिया जाना चाहिए। इससे वहां पर सड़क भी चौड़ी होगी और आयातायत जाम की नौबत भी नहीं आएगी।

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