
नई दिल्ली। देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ( Former PM Manmohan Singh ) दुनिया के सबसे बेहतरीन इकोनॉमिस्ट भी हैं। उन्होंने देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में आरबीआई गवर्नर की भूमिका भी निभाई है तो वो नरसिम्हा राव की सरकार में देश के वित्त मंत्री रहे और देश को ऐसे ग्लोबनाइजेशन के दौर में लेकर आए कि भारत जैसा विकासशील देश अब विकसित देशों का मुकाबला कर रहा है। फिर देश के प्रधानमंत्री रहते हुए 2011 के आर्थिक मंदी ( Global Recession ) से देश को उबारा ही नहीं बल्कि इकोनॉमी को आगे की ओर लेकर आए। आज उन्हीं ने सरकार को मौजूदा स्थिति से निपटने और देश की इकोनॉकी ( Indian Economy ) को दुरुस्त करने के लिए तीन सुझाव दिए हैं। आपको बता दें कि कोरोना वायरस महामारी ( Coronavirus Pandemic ) से पहले ही देश की इकोनॉमी 4 फीसदी के आसपास आ गई थी जो एक दशक के निचले स्तर पर थी। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर उन्होंने इस बारे में क्या कहा।
मनमोहन ने बताए तीन कदम
विदेशी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार देश के पूर्व प्रधानमंत्री और इकोनॉमिस्ट मनमोहन सिंह ने कहा कि देश के आर्थिक सकंट को दूर करने के लिए सरकार द्वारा तीन कदम उठाना काफी जरूरी है। एक कि सरकार को लोगों की आजिविका के सकंट को दूर करते हुए उनके खातों में डायरेक्ट कैश ट्रांसफर करना होगा। दूसरा कि सरकारी क्रेडिट गारंटी प्रोग्राम के थ्रू कारोबार को कैपिटल अरेंज करे। वहीं आखिरी और तीसरा कदम है कि इंस्टीट्यूशनल ऑटोनॉमी एंड प्रोसेस के तरीके से फाइनेंशियल सेक्टर को दुरुस्तम करना चाहिए।
मनमोहन ने इस मंदी को नहीं माना डिप्रेशन
विदेशी मीडिया से बात करने के दौरान उन्होंने इस आर्थिक संंकट को डिप्रेशन मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वो 'डिप्रेशन' जैसे शब्दों का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं करना चाहते हैं। एक गहरी और लंबे समय तक आर्थिक मंदी अपरिहार्य थी। उन्होंने यह बात जोर देकर कही कि यह आर्थिक मंदी मानवीय संकटों की वजह से पैदा हुई है। यह हमारे समाज में कैद भावनाओं से केवल आर्थिक संख्या और तरीकों से देखने के लिए महत्वपूर्ण है।
इंडियन इकोनॉमी सयंकट में
मौजूदा समय में भारतीय अर्थव्यवस्था काफी संकट में है। जिसकी शुरूआत कोरोना वायरस के आने से पहले ही हो चुकी थी, जिसे कोरोना के बाद और बल मिल गया। वहीं दूसरी ओर कोरोना संक्रमण महीरों की संख्या के हिसाब से बात करें तो भारत अमरीका और ब्राजील के बाद तीसरे नंबर पर है। इकोनॉमिस्टों की मानें तो 2020-21 वित्तीय वर्ष के लिए भारत की जीडीपी में तेज गिरावट आने की चेतावनी दी गई है। जो 1970 के दशक के बाद सबसे खराब मंदी हो सकती है।