अर्थव्‍यवस्‍था

ट्रक-बसों की हड़ताल जारी: मुंबई समेत पूरे देश में जनजीवन बेहाल, पहले दिन 2000 करोड़ से अधिक का नुकसान

ट्रक हड़ताल का दूसरा दिन: पूरे देश में जनजीवन प्रभावित, जरूरी सामान की आवाजाही ठप।

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Jul 21, 2018
Truck Bus Strike
ट्रक-बसों की हड़ताल जारी: मुंबई समेत पूरे देश में जनजीवन बेहाल, पहले दिन 2000 करोड़ से अधिक का नुकसान

नई दिल्ली। डीजल की कीमतों, थर्ड पार्टी बीमा समेत अन्य मांगों को लेकर शुक्रवार 20 जुलाई से हड़ताल पर गए ट्रक-बस ऑपरेटरों की हड़ताल शनिवार 21 जुलाई को जारी रही। हड़ताल के पहले दिन ट्रकों-बसों के पहिए थमने से पूरे देश में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा परेशानी शहरी क्षेत्रों में हुई जहां स्कूली बसें नहीं चलने से बच्चों को स्कूल के लिए पैदल जाना पड़ा। इसके अलावा ट्रक नहीं चलने से जरूरी सामानों की आपूर्ति भी थम गई। दूसरे दिन भी कुछ यही हाल रहा। मुंबई में दूसरे दिन भी बसें नहीं चलने से स्कूली बच्चे परेशान रहे। दिल्ली एनसीआर समेत देश के दूसरे शहरों में भी एेसा ही हाल रहा। ट्रक-बसों की हड़ताल से पहले दिन 2000 करोड़ रुपए से अधिक के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

मुंबई में हाल बेहाल

ट्रक आैर बस आॅपरेटर्स के संगठन अाॅल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के आह्वान पर बुलाई गई ट्रक-बसों की हड़ताल से सबसे ज्यादा देश की आर्थिक राजधानी मुंबई प्रभावित हो रही है। हड़ताल के दूसरे दिन भी बसें नहीं चलने से स्कूली बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह के समय अधिकांश बच्चे अपने माता-पिता के साथ स्कूल जाते दिखे। हड़ताल के कारण सड़कों पर ट्रकों-बसों की कतारें लगी हुई हैं। इसके अलावा व्यापारियों को भी माल लाने-भेजने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आपको बता दें कि इस हड़ताल में करीब 90 लाख ट्रक ऑपरेटर और 50 लाख प्राइवेट बस ऑपरेटर शामिल हैं।

एसोचैम ने दी चेतावनी

उद्योगों से जुड़े संगठन एसोचैम ने ट्रक-बसों की हड़ताल को लेकर चेतावनी दी है। एसोचैम ने कहा है कि अगर इस हड़ताल को जल्द से जल्द खत्म नहीं किया गया तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगेगा। एसोचैम ने आशंका जताई है कि इस हड़ताल से थोक सेल प्राइस इंडेक्‍स और कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स बुरी तरह से प्रभावित होगा और जरूरी चीजों के दाम बढ़ जाएंगे। एसोचैम का अनुमान है कि इस हड़ताल की वजह से इकोनॉमी को 20 से 25 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। एसोचैम ने सरकार से जल्द से जल्द इस हड़ताल को खत्म कराने की अपील की है।

ये हैं ट्रक-बस ऑपरेटरों की प्रमुख मांगें

- डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए। इसके अलावा सभी राज्यों में डीजल की दरें एक समान की जाएं।

- टोल कलेक्शन सिस्टम को बदला जाए। टोल के मौजूद सिस्टम से टोल प्लाजा पर ईंधन और समय का नुकसान होता है। इससे ट्रक ऑपरेटरों को हर साल 1.5 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होता है।

- थर्ड पार्टी बीमा प्रीमियम से जीएसटी को हटाया जाए। साथ ही इससे एजेंट को मिलने वाले अतिरिक्त कमीशन को भी खत्म किया जाए।

- इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 44AE में प्रिजेंप्टिव इनकम के तहत लगने वाले टीडीएस को बंद किया जाए।

- ट्रक ऑपरेटरों को राहत देने के लिए ई-वे बिल में बदलाव किया जाए।

Updated on:
21 Jul 2018 12:15 pm
Published on:
21 Jul 2018 10:24 am