70 साल के दइतरी नायक ने सूख रही सौ एकड़ खेती के लिए पहाड़ खोदकर नहर बनाई है। दइतरी ने गोइनसिका नामक पहाड़ के बीच से तीन किलोमीटर तक रास्ता बनाकर कर प्यासे क्षेत्र को जलधार दी है।
माउंटेनमैन दशरथ माझी की तर्ज पर अब ओडिशा को कैनाल मैन मिला है। 70 साल के दइतरी नायक ने सूख रही सौ एकड़ खेती के लिए पहाड़ खोदकर नहर बनाई है। दइतरी ने गोइनसिका नामक पहाड़ के बीच से तीन किलोमीटर तक रास्ता बनाकर कर प्यासे क्षेत्र को जलधार दी है। इसके लिए उन्हें चार साल लगे।
क्योंझर जिले के बंसपाल ब्लॉक के बैतरनी गांव के दइतरनी को बस एक धुन थी कि उनके गांव में खेती के लिए सिंचाई की ठोस व्यवस्था हो। शुरुआत में उन्होंने पहाड़ का सीना चीरना शुरू किया, तो लोग उनका उपहार उड़ाते थे। पहाड़ की दूसरी तरफ एक नहर है जिसे इनके गांव तक लाना संभव नहीं हो पा रहा था।
दईतरी बताते हैं कि इस काम में उनके पांच भाई भी उनकी मदद करते थे। वे बताते हैं कि पहाड़ों को काटने में जुटा, तो लोगों ने खिल्ली उड़ाई। एक बार तो ऐसा भी लगा कि यह काम बहुत ज्यादा कठिन है नहीं होगा, लेकिन हमने हिम्मत नहीं हारी। भाइयों ने हिम्मत दी। कुदाली, गैती आदि से काम शुरू किया। चार साल में सफल हुए।
लोगों ने दिया नया नाम
यह कहानी दशरथ माझी की याद दिलाती है जिसने बिहार में पहाड़ के बीच से सडक़ निकाल दी थी। तब लोगों ने दशरथ माझी को माउंटेन मैन कहा था। इसी तर्ज पर दइतरी को भी कैनाल मैन कहा जाने लगा है। लघु सिंचाई विभाग नहर को स्थाई बनाने के लिए चेकडैम बनाएगा।
अच्छी होगी फसल
दइतरी के भाई मायाधर नायक कहते हैं कि गांव का चेहरा खिल उठा है। अब खेती अच्छी होने लगेगी। नहर तैयार है। रास्ता तो दइतरी ने दिखा दिया। इसे पक्की नहर बनाने के लिए सरकार से गुहार की जाएगी।