शिक्षा

बिहार के स्कूलों में अब बच्चों के शरीर के वजन से तय होगा बस्ते का बोझ, सरकार का सख्त आदेश

Bihar School Bag Policy: बिहार शिक्षा विभाग ने स्कूलों को सख्त निर्देश दिया है कि बच्चों के बैग का वजन उनके शरीर के वजन के 10 परसेंट से ज्यादा नहीं होना चाहिए। नियम तोड़ने वाले निजी स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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May 18, 2026
Bihar School Bag Policy
School Bag Weight Rule (Image- Freepik)

School Bag Weight Rule: भारी-भरकम स्कूल बैग टांग कर स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए राहत की खबर है। बिहार शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी निजी और सरकारी स्कूलों को एक अहम निर्देश जारी किया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए सरकार ने कहा है कि, अब किसी भी स्टूडेंट के स्कूल बैग का वजन उसके शरीर के कुल वजन के 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

शिक्षा विभाग ने स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि, वे अपने कैंपस में वजन नापने की मशीन वेइंग स्केल लगाएं और नियमित रूप से बच्चों के बैग का वजन चेक करें। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि, जो भी निजी स्कूल इस नियम की अनदेखी करेगा उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

क्या है स्कूल बैग पॉलिसी 2020

भारत के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी स्कूल बैग पॉलिसी 2020 के अनुसार, किसी भी बच्चे के बस्ते का वजन उसके शारीरिक वजन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। यह महत्वपूर्ण नियम प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं कक्षा तक के सभी स्टूडेंट्स पर समान रूप से लागू होता है। इसके अलावा इस नीति में छोटे बच्चों को घर के लिए होमवर्क न देने की बात भी कही गई है। साथ ही स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि, वे अपने यहां बच्चों के लिए लॉकर और साफ पीने के पानी की उचित व्यवस्था करें।

टाइमटेबल में बदलाव की जरूरत

बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि, इस कदम का खास उद्देश्य मासूम बच्चों के कंधों से शारीरिक बोझ को कम करना है। उन्होंने कहा कि, स्कूलों को अब ऐसा टाइमटेबल बनाना चाहिए जिससे बच्चों को हर दिन जरूरत से ज्यादा किताबें या कॉपियां स्कूल न लानी पड़ें। नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने दिए हैं सख्त निर्देश

शिक्षा मंत्री ने बताया कि, यह बड़ा फैसला मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देशों के बाद लिया गया है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में निजी स्कूलों को मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने को लेकर भी कड़ी चेतावनी दी थी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की बात कही थी। शिक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों का बेहतर स्वास्थ्य और तनाव मुक्त दिमाग देश के निर्माण के लिए बहुत जरूरी है इसलिए खेलकूद और कला शिक्षा को भी टाइमटेबल में पर्याप्त जगह मिलनी चाहिए।

शिक्षक हर तीन महीने में करेंगे चेकिंग

एनसीईआरटी के दिशा निर्देशों के मुताबिक, स्कूलों में बैग का वजन चेक करना अब एक नियमित प्रक्रिया होनी चाहिए। कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के लिए टीचर्स की यह जिम्मेदारी तय की गई है कि, वे हर तीन महीने में कम से कम एक बार पूरी क्लास के बच्चों के बैग का अचानक वजन चेक करें। अगर किसी बच्चे का बैग भारी मिलता है तो इसकी जानकारी तुरंत उसके माता-पिता को दी जाएगी। इसके बाद एक या दो हफ्ते तक उस बच्चे के बैग की निगरानी होगी ताकि, यह तय किया जा सके कि वह तय मानक के अनुसार, हल्का बैग लेकर स्कूल आ रहा है या नहीं।

Updated on:
18 May 2026 08:57 pm
Published on:
18 May 2026 08:57 pm