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CBSE सीबीएसई ने स्टूडेंट्स को दी बड़ी राहत, रीचेकिंग फीस में की कटौती, नंबर बढ़े तो मिलेगा पूरा रिफंड

CBSE On Screen Marking: सीबीएसई ने कॉपियों की रीचेकिंग स्कैन कॉपी और वेरिफिकेशन की फीस में भारी कटौती कर इसे 100 रुपये कर दिया है। इसके साथ ही नंबर बढ़ने पर पूरी फीस वापस करने का भी ऐलान किया है।

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भारत

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Mohsina Bano

May 17, 2026

CBSE Revaluation Fee

CBSE Revaluation Fee : रीचेकिंग फीस में की कटौती, नंबर बढ़े तो मिलेगा पूरा रिफंड

CBSE Revaluation Fee: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 12वीं के नतीजों के बाद स्टूडेंट्स को बड़ी राहत दी है। बोर्ड ने आंसर शीट की स्कैन कॉपी मंगाने, नंबरों के वेरिफिकेशन और रीइवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) की फीस में भारी कटौती का ऐलान किया है। हाल ही में कॉपियों की डिजिटल चेकिंग (ऑन स्क्रीन मार्किंग) को लेकर उठे विवाद और ज्यादा फीस की शिकायतों के बाद बोर्ड ने यह अहम फैसला लिया है। शिक्षा मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह जानकारी साझा की है।

अब कितनी लगेगी फीस

नए नियमों के मुताबिक, अब स्टूडेंट्स को चेक की गई आंसर शीट की स्कैन कॉपी पाने और नंबरों के वेरिफिकेशन के लिए सिर्फ 100 रुपये देने होंगे। वहीं किसी एक खास सवाल के रीइवैल्यूएशन के लिए 25 रुपये फीस तय की गई है। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि, अगर रीइवैल्यूएशन के बाद स्टूडेंट्स के नंबर बढ़ते हैं तो उसे पूरी फीस रिफंड (वापस) कर दी जाएगी।

पहले चुकानी पड़ती थी भारी रकम

आपको बता दें कि इससे पहले स्टूडेंट्स को स्कैन कॉपी मंगाने के लिए प्रति विषय 700 रुपये और वेरिफिकेशन के लिए 500 रुपये चुकाने पड़ते थे। वहीं पहले प्रति प्रश्न रीइवैल्यूएशन की फीस 100 रुपये थी। स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार ने बताया कि, फीस के इस नए ढांचे का मकसद इस पूरी प्रक्रिया को स्टूडेंट्स के लिए आसान पारदर्शी और ज्यादा से ज्यादा लोगों की पहुंच में लाना है।

ऑन स्क्रीन मार्किंग पर भी दी सफाई

नई दिल्ली में हुई प्रेस-कॉन्फ्रेंस के दौरान संजय कुमार ने ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम पर भी स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि, यह सिस्टम पहली बार लागू नहीं हो रहा है। सीबीएसई ने 2014 में भी इसे शुरू किया था लेकिन तब तकनीकी और बुनियादी ढांचे की कमियों के कारण इसे बड़े पैमाने पर जारी नहीं रखा जा सका।

98 लाख कॉपियों की हुई डिजिटल चेकिंग

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस बार करीब 98 लाख आंसर शीट को स्कैन करके पीडीएफ फाइल में बदला गया और फिर डिजिटल चेकिंगके लिए भेजा गया। अधिकारियों ने बताया कि, स्कैनिंग के दौरान तीन स्तर की सुरक्षा अपनाई गई ताकि, कोई पेज छूटे नहीं सब कुछ साफ पढ़ा जा सके और सुरक्षा कोडिंग की सही तरीके से जांच हो सके। साथ ही बोर्ड ने यह जानकारी भी दी कि जिन 13 हजार कॉपियों की स्याही खराब थी या वे स्कैन होने लायक नहीं थीं उन्हें मैनुअल तरीके (हाथों से) चेक किया गया है।