जर्मनी का शिक्षा प्रणाली दुनिया में प्रसिद्ध है, विशेषकर तकनीकी शिक्षा और शोध के क्षेत्र में। यहां के विश्वविद्यालयों में ट्यूशन फीस या तो नहीं होती, या फिर बहुत कम होती है।
Indian Students Abroad: पिछले कुछ वर्षों में भारतीय छात्रों के विदेश में पढ़ाई करने का रुझान बढ़ा है। जहां पहले अमरीका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूके जैसे देशों को प्राथमिकता दी जाती थी, वहीं अब जर्मनी, रूस, फ्रांस और न्यूजीलैंड की ओर छात्रों का रुझान बढ़ा है। इसके पीछे कई कारण हैं, जिनसे इन देशों को भारतीय छात्र पसंद कर रहे हैं।
जर्मनी: शिक्षा के साथ रोजगार का मौका
जर्मनी का शिक्षा प्रणाली दुनिया में प्रसिद्ध है, विशेषकर तकनीकी शिक्षा और शोध के क्षेत्र में। यहां के विश्वविद्यालयों में ट्यूशन फीस या तो नहीं होती, या फिर बहुत कम होती है। जर्मनी में उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के साथ-साथ इंडस्ट्री ट्रेनिंग का भी अवसर मिलता है। यहां 18 महीने का जॉब सीकिंग वीजा भी मिलता है, जिससे छात्र पढ़ाई के बाद नौकरी ढूंढ सकते हैं। हालांकि, जर्मन भाषा का ज्ञान यहां सफलता के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
रूस: सस्ती मेडिकल शिक्षा
रूस में मेडिकल शिक्षा भारत के मुकाबले लगभग 50% सस्ती होती है। यहां की प्रवेश प्रक्रिया सरल और अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध है। भारत में मेडिकल कॉलेजों की सीटों की कमी और ऊंची फीस के कारण रूस एक आकर्षक विकल्प बन गया है। यहां मेडिकल डिग्रियां भारत में मान्यता प्राप्त हैं और स्नातक के बाद यूरोप और एशिया में नौकरी के अवसर मिलते हैं।
फ्रांस: शिक्षा के साथ रोजगार के अवसर
फ्रांस में भारतीय छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, खासकर मैनेजमेंट, आर्ट्स और फैशन क्षेत्र में। यहां के प्रमुख बिजनेस स्कूल जैसे INSEAD और HEC Paris वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध हैं। छात्र वीजा पर पढ़ाई के साथ काम करने का अवसर मिलता है, जिससे छात्र अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। फ्रांस का पेरिस फैशन और कला का ग्लोबल हब है, जिससे संबंधित क्षेत्रों के छात्रों के लिए अधिक अवसर होते हैं।
न्यूजीलैंड: स्थायी निवास और अध्ययन के मौके
न्यूजीलैंड भारतीय छात्रों के लिए एक नया आकर्षण बन रहा है, खासकर उन छात्रों के लिए जो पढ़ाई के बाद स्थायी निवास की योजना बनाते हैं। यहां कई छात्रवृत्तियां और वर्क-स्टडी ऑप्शन उपलब्ध हैं। छात्र 20 घंटे तक काम कर सकते हैं और छुट्टियों में फुल-टाइम काम कर सकते हैं। न्यूजीलैंड में वर्क वीजा की संभावना अधिक होती है, और यह देश सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी जाना जाता है।
इंडस्ट्री-ओरिएंटेड शिक्षा: भारत में शिक्षा मुख्य रूप से थ्योरी पर आधारित होती है, जबकि इन देशों में शिक्षा को इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जाता है।
रिसर्च और डेवलपमेंट: भारत अपने GDP का 0.7% हिस्सा रिसर्च पर खर्च करता है, जबकि जर्मनी, रूस और फ्रांस में यह आंकड़ा 3% के आसपास होता है। इससे छात्रों को इंटर्नशिप और जॉब के बेहतर अवसर मिलते हैं।
ग्लोबल एक्सपोजर: इन देशों में पढ़ाई से छात्रों को अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्किंग और मल्टीकल्चरल एक्सपोजर मिलता है। यहां के विश्वविद्यालयों में वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ काम करने के मौके होते हैं।
स्वास्थ्य और जीवनशैली: इन देशों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हैं, खासकर जर्मनी और फ्रांस में सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजना लागू है, जिससे मेडिकल खर्च कम होता है। न्यूजीलैंड को भी हेल्दी लाइफस्टाइल वाले देशों में गिना जाता है।
अमरीका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया से बेरुखी क्यों? इसका मुख्य कारण इन चारों देशों में भारतीयों के प्रति नस्लवाद की घटनाएँ बढ़ना और इन देशों के उच्च शिक्षा संस्थानों की प्रतिष्ठा कम होना है। इसके अलावा ज्यादा फीस, वीजा में दिक्कतें और काम की भी दिक्कतें हैं।