Job Exit Rules: नोटिस पीरियड सर्व करना जरूरी है या नहीं? क्या कंपनी आपका एक्सपीरियंस लेटर रोक सकती है? जानें इस्तीफे से जुड़े वो सभी नियम और कानून जो हर कर्मचारी को पता होने चाहिए।
Notice Period Rules in India: नौकरी छोड़ते समय अक्सर कर्मचारियों के मन में यह सवाल आता है कि क्या उन्हें 30, 60 या 90 दिनों का नोटिस पीरियड पूरा करना ही होगा? कई बार नई नौकरी जल्दी जॉइन करने के दबाव में कर्मचारी नोटिस पीरियड छोड़ना चाहते हैं। कानूनी जानकारों के मुताबिक, भारत में नोटिस पीरियड से जुड़े नियम काफी हद तक आपके एम्प्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट (रोजगार अनुबंध) पर डिपेंड करते हैं। आइए, जानते हैं कि इस बारे में देश का कानून और नए लेबर कोड क्या कहते हैं। जानिए इस्तीफे से जुड़े वो कानून जो हर एम्प्लॉयी को पता होने चाहिए।
कानूनी जानकारों के मुताबिक, भारत में सभी कर्मचारियों के लिए कोई एक समान (यूनिफॉर्म) नोटिस पीरियड तय नहीं है। ज्यादातर प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों में नोटिस पीरियड उस कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर तय होता है, जिस पर आपने जॉइनिंग के समय सिग्नेचर किए थे। नए श्रम कानून(लेबर कोड 2020) भी यही कहते हैं कि नोटिस पीरियड मुख्य रूप से कंपनी और एम्प्लॉयी के बीच हुए समझौते का हिस्सा है।
बहुत से एम्प्लॉयीज को डर रहता है कि नोटिस पीरियड सर्व न करने पर कंपनी उन पर कानूनी कार्रवाई कर सकती है। हालांकि, हकीकत थोड़ी अलग है। विशेषज्ञों के अनुसार, नोटिस पीरियड न देना कोई आपराधिक मामला नहीं है।
कुछ खास स्थितियों में कर्मचारी बिना नोटिस पीरियड पूरा किए भी नौकरी छोड़ सकता है-
कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंता एक्सपीरियंस लेटर और बकाया वेतन को लेकर रहती है। कानून के हिसाब से देखा जाए तो कंपनी आपका कमाया हुआ वेतन नहीं रोक सकती। वे नोटिस पीरियड के दिनों की कटौती आपके फुल एंड फाइनल सेटलमेंट (F&F) से कर सकते हैं, लेकिन बाकी पैसा देना ही होगा। साथ ही, नोटिस पीरियड सर्व न करने के आधार पर कंपनी आपका एक्सपीरियंस लेटर या रिलीविंग लेटर रोकने का अधिकार नहीं रखती है।
भले ही नोटिस पीरियड न देना कोई अपराध नहीं है, लेकिन यह आपके प्रोफेशनल करियर पर असर डाल सकता है। आईटी और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में कॉन्ट्रैक्ट बहुत कड़े होते हैं। इसलिए इस्तीफा देने से पहले अपने कॉन्ट्रैक्ट को ध्यान से पढ़ें और कोशिश करें कि आपसी बातचीत से 'अर्ली एग्जिट' का रास्ता निकाला जाए।