ओडिशा सरकार ने राज्य में २१ हाई स्कूलों को हायर सेकंडरी स्कूलों में परिवर्तित करने का निर्णय लिया है।
ओडिशा सरकार ने राज्य में २१ हाई स्कूलों को हायर सेकंडरी स्कूलों में परिवर्तित करने का निर्णय लिया है। इसके पीछे मकसद एससी और एसटी स्टूडेंट्स को साइंस एजुकेशन मुहैया करवाना है। हाल ही एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि की। एसटी एंड एससी डेवलपमेंट, माइनॉरिटीज एंड बैकवर्ड क्लासेस वेलफेयर मिनिस्टर रमेश चंद्र माझी ने कहा कि नए अपग्रेड किए गए स्कूल गजापति, कंधमाल, सुंदरगढ़, नबरंगपुर, कोरापुट, रायगढ़, मलकांगिरी, कलाहांडी, मयूरभंज और बालनगिर जिले के हों। यह साइंस स्ट्रीम हायर सेकंडरी स्कूल होंगे।
माझी ने कहा - मौजूदा एकेडमिक सेशन २०१८-१९ के लिए राज्य में २१ हाई स्कूलों को हायर सेकंडरी स्कूलों में अपग्रेड किया जाएगा। इन स्कूलों में क्लासेस भी इसी साल से शुरू होंगी। इसके लिए सरकार ने १५४ जूनियर लेक्चरर भी नियुक्त किए गए हैं। इससे पहले राज्य में मयूरभंज, गजपति, कलाहांडी, संबलपुर, क्योंझर, सुंदरगढ़, रायगढ़, मलकांगिरी, नबरंगपुर जिलों के २६ हाई स्कूलों को हायर सेकंडरी स्कूलों में अपग्रेड किया गया था। इन स्कूलों को एससी/एसटी डेवलपमेंट डिपार्टमेंट चलाता है।
मप्र : ‘एक परिसर, एक शाला’ की प्रक्रिया 1 अक्टूबर तक पूरी होगी
मध्यप्रदेश में स्कूली शिक्षा में सुधार के लिए नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इसके तहत विभिन्न स्तर और समान स्तर की शालाओं को एक करते हुए एक शाला के रूप में संचालित किया जाना है। यह प्रक्रिया आगामी एक अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी।
आधिकारिक तौर पर जारी बयान के अनुसार - एक परिसर-एक शाला’ के क्रियान्वयन के लिए स्कूली शिक्षा विभाग ने जिलास्तरीय समिति के गठन के लिए जिलाधिकारियों को आदेश दिए हैं। बयान के अनुसार - जिलास्तरीय समिति कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित होगी। समिति में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, जिला शिक्षा अधिकारी, आदिम जाति कल्याण के सहायक आयुक्त, प्राचार्य (डाईट और जिला परियोजना समन्वय) को शामिल किया गया है। समिति निश्चित समय-सारणी के अनुसार कार्य करेगी।
प्रदेश में ‘एक परिसर-एक शाला’ के क्रियान्वयन से मानव एवं भौतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सकेगा। इसके साथ ही शिक्षकों की मांग में भी कमी आएगी और व्यय पर नियंत्रण हो सकेगा। प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 224 विकासखण्डों में संचालित 34 हजार 997 स्कूलों को एक किए जाने पर ऐसे स्कूलों की संख्या 15 हजार 961 हो जाएगी।