शिक्षा

Rajasthan Sarthak Naam Abhiyan Campaign: राजस्थान में ‘सार्थक नाम अभियान’ बवाल के बाद बैकफुट पर सरकार, वापस ली विवादित लिस्ट

Rajasthan Sarthak Naam Abhiyan: राजस्थान में सार्थक नाम अभियान की विवादित सूची वापस ली गई। 'अकबर' और 'अहंकार' जैसे नामों पर विवाद के बाद शिक्षा विभाग अब नया संशोधित ड्राफ्ट जारी करेगा।

2 min read
Apr 17, 2026
Rajasthan Sarthak Naam Abhiyan Controversy (Image- Gemini)

Rajasthan Sarthak Naam Abhiyan Controversy: राजस्थान के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के इरादे से शुरू किया गया 'सार्थक नाम अभियान' खुद ही विवादों के भंवर में फंस गया है। शिक्षा विभाग द्वारा जारी सुझावों की सूची में अकबर, अहंकार, और भयंकर जैसे शब्दों को शामिल करने पर जनता का गुस्सा फूट पड़ा। सोशल मीडिया पर हुई किरकिरी और अभिभावकों के कड़े विरोध के बाद, विभाग ने इस लिस्ट को तुरंत प्रभाव से वापस ले लिया है। अब विभाग अधिक संवेदनशीलता के साथ नई संशोधित सूची तैयार करने की तैयारी कर रहा है।

ये भी पढ़ें

CUET UG 2026: सीयूईटी यूजी सिटी इंटीमेशन स्लिप जल्द जारी होगी, सीधे इस लिंक से करें डाउनलोड, एडमिट कार्ड रिलीज डेट भी जानें

इन नामों पर मचा बवाल

शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई पुरानी सूची में कुछ ऐसे नाम शामिल थे, जिन पर सवाल खड़े हो गए। लिस्ट में अकबर को 'महान मुगल सम्राट' के रूप में परिभाषित किया गया था, तो वहीं भयंकर (डरावना), भिक्षा (भीख), अहंकार (घमंड) और बेचारादास (असहाय सेवक) जैसे शब्दों को भी जगह दी गई थी। आलोचकों का तर्क है कि, इस तरह के नामों को सूची में शामिल करना गलत निर्णय था और इससे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचने का जोखिम था।

शिक्षा मंत्री ने दी सफाई

विवाद बढ़ता देख शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने साफ किया है कि इस अभियान का उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं, बल्कि बच्चों को गरिमापूर्ण नाम देना है ताकि उनमें आत्मविश्वास बढ़ सके। उन्होंने स्वीकार किया कि सूची केवल सुझाव के तौर पर थी और इसमें कुछ अनुचित नाम अनजाने में शामिल हो गए थे। विभाग ने अब इस लिस्ट को रद्द कर दिया है और आश्वासन दिया है कि नई सूची अधिक सावधानी से तैयार की जाएगी।

क्या है सार्थक नाम अभियान और इसके नियम?

यह अभियान विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में उन बच्चों के लिए शुरू किया गया था, जिनके नाम कई बार मजाक का कारण बनते हैं या उनके आत्मविश्वास को प्रभावित करते हैं। अभियान के मुख्य बिंदु ये थे:

  • कक्षा 1 से 9 तक: इस आयु वर्ग के छात्र अपना नाम बदल सकेंगे।
  • स्वैच्छिक प्रक्रिया: नाम बदलना पूरी तरह से स्वैच्छिक होगा, किसी पर भी इसे थोपा नहीं जाएगा।
  • अभिभावकों की सहमति: स्कूल केवल मार्गदर्शन करेंगे, अंतिम निर्णय और लिखित सहमति माता-पिता की ही होगी।
  • आधिकारिक अपडेट: सहमति के बाद ही स्कूल रिकॉर्ड में नाम बदला जाएगा।

सुधार और व्यक्तिगत अधिकार के बीच संतुलन

जहां कुछ शिक्षाविदों का मानना है कि इस अभियान से बच्चों का मनोबल बढ़ेगा, वहीं कुछ लोग इसे व्यक्तिगत पसंद में सरकारी हस्तक्षेप मान रहे हैं। सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि वह सामाजिक सुधार और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाती है। भविष्य में इस अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नई सूची को कितना संवेदनशील और तर्कसंगत बनाया जाता है।

ये भी पढ़ें

JEE Main Result 2026: इस तारीख को जारी होगा जेईई मेन सेशन 2 का रिजल्ट, जानिए क्या है लेटेस्ट अपडेट
Published on:
17 Apr 2026 04:52 pm
Also Read
View All