UPSC Success Story: क्या गांव में रहकर भी UPSC पास की जा सकती है? किसान के बेटे उत्कर्ष गौरव ने तानों और असफलताओं को पीछे छोड़ चौथे प्रयास में इसे सही साबित कर दिया है। जानिए उनकी तैयारी, संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी।
IRMS Officer Utkarsh Gaurav: बिहार के नालंदा जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर यूपीएससी की परीक्षा पास करने वाले उत्कर्ष गौरव आज लाखों युवाओं के लिए रोल मॉडल बन गई है। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे उत्कर्ष ने तमाम चुनौतियों और लोगों के तानों के बावजूद हार नहीं मानी और चौथे प्रयास में सफलता हासिल कर सरकारी अफसर बनने का सपना पूरा किया।
उत्कर्ष मूल रूप से नालंदा के अमरगांव (भगवान बीघा) के रहने वाले हैं। उन्होंने साल 2018 में बेंगलुरु से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। बीटेक के बाद उन्होंने मोटी सैलरी वाली नौकरी करने के बजाय देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी की तैयारी करने का फैसला किया। उत्कर्ष कोचिंग के लिए दिल्ली भी गए लेकिन शुरुआती तीन प्रयासों में उन्हें असफलता ही हाथ लगी।
जब कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन लगा, तो उत्कर्ष अपने गांव वापस लौट आए। बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी नौकरी न करने पर गांव के लोग अक्सर उन पर तंज कसते थे कि, इतनी पढ़ाई के बाद भी नौकरी क्यों नहीं कर रहे। हालांकि, इस कठिन समय में उनके परिवार ने उनका साथ दिया। उत्कर्ष का कहना है कि, गांव में रहने से उनका दिल्ली में होने वाला भारी-भरकम खर्चा बच जाता था और घर के माहौल से उन्हें मानसिक शांति मिली। इसका ये फायदा हुआ की वह अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान लगा पाए।
अपनी तैयारी को लेकर उत्कर्ष ने बताया कि, उन्होंने सफलता के लिए खुद को सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर कर लिया था। गांव में रहकर तैयारी के दौरान उन्होंने जरूरी टिप्स और गाइडेंस के लिए यूट्यूब का सहारा लिया। उत्कर्ष के मुताबिक, आप जी-जान से मेहनत करते हैं तो आपको सफल होने से कोई नही रोक सकता। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो शहर की चकाचौंध से दूर रहकर भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
उत्कर्ष की मेहनत आखिरकार रंग लाई और साल 2022 की यूपीएससी परीक्षा में उन्होंने देशभर में 709वीं रैंक हासिल की। वर्तमान में वे भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा (IRMS) में अधिकारी के पद पर तैनात हैं। उनका मानना है कि, किसी भी प्रतियोगी परीक्षा को पास करने के लिए कड़ी मेहनत के साथ-साथ किस्मत का होना भी जरूरी है। उनकी यह कहानी आज उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल है जो आर्थिक तंगी या संसाधनों के अभाव में अपना सपना छोड़ देते हैं।