चुनाव

UP Assembly Election 2022: ब्राह्मणों को लुभाने में जुटी मायावती से खिसक रहा उनका कोर वोट बैंक, असमंजस में दलित मतदाता

UP Assembly Election 2022: सोशल इंजीनियरिंग के भरोसे भले ही मायावती 2007 में 30 फीसदी से ज्यादा वोटों के साथ यूपी की सत्ता में आयी थीं। लेकिन उसके बाद के सभी चुनावों में बसपा को वोट प्रतिशत लगातार घटा है। इसमें सबसे अहम बात ये है कि सुरक्षित सीटों पर भी मायावती कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकीं। जानकारों के मुताबिक मायावती के वोट बैंक में सबसे तगड़ी सेंधमारी बीजेपी ने की।

2 min read
Jan 09, 2022

UP Assembly Election 2022: लखनऊ. चुनाव की तारीखों के साथ ही सभी दल हाई अलर्ट मोड में आ गये हैं। जनसभाओं, रैलियों, घोषणाओं और वादों पर पूरी तरह रोक लग गयी है। यूपी में 10 फरवरी को पहले चरण के मतदान के साथ सियासी महायुद्ध की शुरुआत हो जाएगी। सत्ता के लिए सभी दलों ने कमर कस ली है वहीं अब बारी मतदाताओं की है। उनके मन में क्या है ये तो 10 मार्च को ही पता चलेगा। सबसे बड़ी दुविधा की स्थिति इस वक्त दलित मतदाताओं के सामने है। मायावती की निष्क्रियता के चलते जहां वो असमंजस की स्थिति में है वहीं बीजेपी, सपा और कांग्रेस भी उस पर डोरे डाल चुके हैं।

बीजेपी, सपा, कांग्रेस सब डाल रहे डोरे

बीजेपी, मायावती का मुकाबला करने और दलितों को अपनी तरफ रिझाने के लिए उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेबीरानी मौर्य को जाटव चेहरे के तौर पर स्थापित करने में जुटी है। तो वहीं अखिलेश यादव ने बसपा से सपा में आए दलित नेताओं के सहारे सूबे की 45 सुरक्षित सीटों पर जाटव प्रत्याशी उतारने की रणनीति बनाई है। इतना ही नहीं सपा ने दलितों को अपने साथ जोड़ने के लिए अंबेडकर वाहिनी का भी गठन किया है। अंबेडकर वाहिनी सपा के लिए दलितों का फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन होगा।

लगातार घटा है बीएसपी का वोट बैंक

इस सोशल इंजीनियरिंग के भरोसे भले ही मायावती 2007 में 30 फीसदी से ज्यादा वोटों के साथ यूपी की सत्ता में आयी थीं। लेकिन उसके बाद के सभी चुनावों में बसपा को वोट प्रतिशत लगातार घटा है। इसमें सबसे अहम बात ये है कि सुरक्षित सीटों पर भी मायावती कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकीं। जानकारों के मुताबिक मायावती के वोट बैंक में सबसे तगड़ी सेंधमारी बीजेपी ने की। 2017 के चुनावों में जिसका फायदा भी बीजेपी को मिला।

क्यों अहम है दलित वोट बैंक?

यूपी की सियासत में दलित वोट इस वजह से मायने रखता है क्योंकि ये वर्ग ओबीसी के बाद सबसे बड़ा वोट बैंक है। आँकड़ों के मुताबिक प्रदेश में ओबीसी मतदाताओं की संख्या करीब 42 फीसदी है तो दलित मतदाताओं की संख्या करीब 22 फीसदी है।

जाटव और गैर जाटव

दरअसल दलित मतदाता भी दो धड़ें में बँटे हैं - जाटव और गैर जाटव। 22 फीसदी दलित वोटरों में जाटवों की आबादी करीब 14 फीसदी है तो गैर जाटव 8 फीसदी के करीब हैं। मायावती जाटव बिरादरी से ही आती हैं। गैर जाटव के ज्यादातर मतदाताओं को बीजेपी ने अपने पाले में कर लिया है।

Published on:
09 Jan 2022 06:33 pm
Also Read
View All