इंदिरा गांधी हत्या के बाद हुए चुनाव में जब पूरे देश में सहानुभूति की लहर चल रही थी और कांग्रेस प्रचण्ड जीत हासिल की थी। तब भी यह सीट कांग्रेस हार गयी थी। वहीं 1991 के चुनाव में जब पूरे देश और प्रदेश में राम लहर चल रही तब आगरा की नौ सीटों में से छह सीटें बीजेपी की झोली में गिरी थीं लेकिन रामलहर के बावजूद यह सीट बीजेपी के खाते में नहीं आयी थी।

UP Assembly elections 2022: पहले दयालबाग सीट के नाम से जानी जाने वाली आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट पर 10 फरवरी को मतदान होना है। इस सीट को यह नाम परिसीमन के बाद मिला। जिसके बाद 2012 में यह सीट सुरक्षित हो गई। आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट में नाम भले ही ग्रामीण लगा हो, इस सीट के अन्तर्गत आगरा का शहरी हिस्सा आता है। इस सीट की एक खास बात ये भी है कि यह सीट किसी लहर से प्रभावित नहीं होती। 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हत्या के बाद हुए चुनाव में जब पूरे देश में सहानुभूति की लहर चल रही थी और कांग्रेस प्रचण्ड जीत हासिल की थी। तब भी यह सीट कांग्रेस हार गयी थी। वहीं 1991 के चुनाव में जब पूरे देश और प्रदेश में राम लहर चल रही तब आगरा की नौ सीटों में से छह सीटें बीजेपी की झोली में गिरी थीं लेकिन रामलहर के बावजूद यह सीट बीजेपी के खाते में नहीं आयी थी।
जाट बाहुल्य सीट
जाट बाहुल्य सीट होने की वजह से एक जमाने में यहाँ चौधरी चरण सिंह का सिक्का चलता था। परिसीमन के बाद यानि 2012 के बाद से यहाँ दो चुनाव हुए हैं जिनमें से एक यानि 2012 में बीएसपी ने जीत दर्ज की थी तो वहीं 2017 यानि कि पिछले चुनाव में ये सीट बीजेपी के खाते में गयी थी।
2022 में किसने किसको दिया टिकट
मतदाताओं की संख्या
जातीय समीकरण
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विधानसभा चुनाव का इतिहास