
Kabhi Alvida Naa Kehna controversy: करण जौहर की फिल्म 'कभी अलविदा ना कहना' को रिलीज हुए 20 साल पूरे हो गए हैं। साल 2006 में आई इस फिल्म में शादी, रिश्तों और बेवफाई जैसे संवेदनशील मुद्दों को दिखाया गया था। रिलीज के समय फिल्म को लेकर दर्शकों की राय बंटी हुई थी। कुछ लोगों ने इसे रिश्तों को अलग नजरिए से दिखाने के लिए सराहा, तो कई दर्शकों ने फिल्म की कहानी और किरदारों पर सवाल उठाए। अब करण जौहर ने 2 दशक बाद उस दौर को याद करते हुए बताया है कि फिल्म को लेकर दर्शकों का रिएक्शन कितना तीखा था।
करण जौहर ने बताया कि फिल्म की रिलीज से एक रात पहले वो एक नजदीकी थिएटर में रखे गए पेड प्रीव्यू में पहुंचे थे। उन्होंने दर्शकों के बीच बैठकर चुपचाप फिल्म देखी। साथ ही, फिल्म के एक हिस्से के दौरान, एक अधेड़ उम्र के कपल को काफी नाराज होते हुए भी देखा। बता दें, फिल्म खत्म होने के बाद करण जब थिएटर से बाहर निकले तो एक महिला अपनी रोती हुई बेटी के साथ उनके पास पहुंची। करण को लगा कि शायद वो फिल्म देखकर इमोशनल हुई हैं, लेकिन महिला ने उनकी पहचान की पुष्टि करने के बाद उन्हें खरी-खोटी सुनानी शुरू कर दी।
करण के मुताबिक, महिला ने कहा कि वो अपनी बेटी को गाने, डांस और पारिवारिक मूल्यों वाली एक खुशहाल फिल्म दिखाने लाई थीं, क्योंकि ये करण जौहर की फिल्म थी, लेकिन जिस दिन उनकी बेटी का तलाक हुआ, उसी दौरान उन्होंने ये फिल्म देखी। महिला ने करण से कहा कि उन्हें शर्म आनी चाहिए। साथ ही, करण ने आगे बताया कि उस वक्त उन्हें डर लगा कि कहीं महिला गुस्से में उन्हें मार न दें। इसलिए वो वहां से निकल गए और रास्ते में कुछ और नाराज दर्शकों का भी सामना किया।
करण ने कहा कि 'कभी अलविदा ना कहना' को रिलीज के बाद बेहद अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं मिलीं। जहां कुछ दर्शकों ने इसे बहादुर और उनका बेहतरीन काम बताया, तो वहीं कई लोगों ने फिल्म को 'एंटी-संस्कारी' करार दिया। फिल्म में शादीशुदा रिश्तों के बाहर आकर्षण और रिश्तों की जटिलताओं को दिखाया गया था। यही कारण था कि फिल्म की कहानी उस समय चर्चा और विवाद दोनों का कारण बनी।
करण जौहर ने ये भी साफ किया कि 'कभी अलविदा ना कहना' बनाने का मकसद बेवफाई को बढ़ावा देना या उसका समर्थन करना नहीं था। उन्होंने फिल्म की कुछ कमियों को स्वीकार किया और माना कि इसका स्केल काफी बड़ा था और इसमें बड़े-बड़े गाने भी थे। इसके बावजूद करण ने कहा कि उन्हें हमेशा लगता रहा कि फिल्म की कहानी का भावनात्मक पक्ष सही जगह पर था। उनके मुताबिक, फिल्म का उद्देश्य रिश्तों के एक मुश्किल और असहज पहलू को सामने रखना था, न कि बेवफाई को सही ठहराना।
'कभी अलविदा ना कहना' में शाहरुख खान और रानी मुखर्जी लीड रोल में थे। फिल्म में अभिषेक बच्चन, प्रीति जिंटा, अमिताभ बच्चन और किरण खेर भी अहम किरदारों में नजर आए थे। दरअसल, रिलीज के दो दशक बाद भी फिल्म की कहानी, रिश्तों को लेकर इसका नजरिया और उस समय हुई बहस इसे करण जौहर की चर्चित फिल्मों में बनाए हुए है।