
Kumar Vishwas On Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच मशहूर कवि और वक्ता कुमार विश्वास ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देकर बहस को और तेज कर दिया है।
एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी आरोपी से खतरा महसूस भी हो रहा था, तो क्या उसका सीधा जवाब गोली मार देना ही है? कुमार विश्वास ने पुलिस सुधारों की जरूरत पर भी जोर दिया और कहा कि कानून व्यवस्था के नाम पर पुलिस को नियंत्रण से बाहर नहीं होने देना चाहिए।
न्यूज18 से बातचीत में कुमार विश्वास ने कहा, 'अगर आपको लग भी रहा था कि डर है, तो आपकी क्या ट्रेनिंग है? आप सीधे गोली मार देंगे उस आदमी को? कल तक आप कह रहे थे कि वो मानसिक रूप से विक्षिप्त था,और अब आपने उसे गोली मार दी।'
उन्होंने आगे कहा कि आज हर कोई खुद को सख्त कानून व्यवस्था का चेहरा दिखाना चाहता है। सबको योगी आदित्यनाथ बनना है। उनके मुताबिक बुलडोजर और एनकाउंटर जैसी कार्रवाई को ताकत का प्रतीक बनाकर पेश किया जा रहा है, जबकि पुलिस व्यवस्था को संविधान और कानून के दायरे में रहकर काम करना चाहिए।
कुमार विश्वास ने बातचीत के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुझाए गए पुलिस सुधारों का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि वर्षों पहले अदालत ने राज्यों को पुलिस सुधार लागू करने की बात कही थी, लेकिन अधिकांश राज्यों में इन सिफारिशों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस व्यवस्था को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त कर पेशेवर तरीके से काम करने का अवसर मिले, तो कानून व्यवस्था और बेहतर हो सकती है।
दरअसल, बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले भरत भूषण तिवारी की जून 2026 में पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी। पुलिस का दावा है कि भरत के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज थे और उसे पकड़ने पहुंची टीम पर उसने फायरिंग की। पुलिस के मुताबिक जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया।
हालांकि, परिवार और ग्रामीणों की कहानी इससे अलग है। परिजनों का आरोप है कि भरत ने पहले ही आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई। वहीं भरत के एक दोस्त ने भी दावा किया कि पुलिस की आधिकारिक कहानी और घटनाक्रम में अंतर है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
मामले ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। बढ़ते विरोध के बाद बिहार सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। जांच आयोग गवाहों के बयान दर्ज कर रहा है, जबकि मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। मुख्यमंत्री ने भी कहा है कि यदि जांच में किसी की गलती सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस मामले में दो अलग-अलग दावे सामने हैं। एक ओर पुलिस अपनी कार्रवाई को आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बता रही है, वहीं दूसरी ओर परिवार इसे फर्जी एनकाउंटर बता रहा है। ऐसे में कुमार विश्वास का बयान भी इसी बहस के बीच आया है। अब सभी की नजर न्यायिक जांच की रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और पुलिस की कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी या नहीं।