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‘सरकार सब्सिडी वाला मास्क देगी’, Shekhar Suman के तंज ने सोशल मीडिया पर छेड़ी बड़ी बहस

Shekhar Suman sarcastic tweet on government subsidized mask: हाल ही में Shekhar Suman ने एक तंज भरा ट्वीट किया जिसमें उन्होंने कहा, "सरकार सब्सिडी वाला मास्क देगी," जिससे सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छिड़ गई।
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Shekhar Suman

Shekhar Suman (IMDb)

Shekhar Suman government subsidized mask: बॉलीवुड एक्टर शेखर सुमन का एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। अपने हालिया शो के दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जंगलों की कटाई और बढ़ते प्रदूषण को लेकर तीखा व्यंग्य किया, जिससे सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है।

पर्यावरण को लेकर बढ़ती लापरवाही और विकास की कीमत

शेखर सुमन ने अपने शो शेखर टुनाईट में कहा, "चिंता मत करो, बस सो जाओ जब सारे पेड़ कट जाएंगे, जंगल खत्म हो जाएंगे, तब सरकार तुम्हें सब्सिडी वाले मास्क और डिस्काउंट वाले ऑक्सीजन सिलेंडर जरूर देगी।" उनके इस बयान को कई लोग पर्यावरण को लेकर बढ़ती लापरवाही और विकास की कीमत पर प्रकृति को हो रहे नुकसान पर कटाक्ष के रूप में देख रहे हैं।

अब इस बयान को सामने आते ही सोशल मीडिया पर यूजर्स की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। बता दें, कई यूजर्स ने इसे फ्यूचर की गंभीर चेतावनी और खतरा बताया, जबकि कुछ ने इसे फिल्मों जैसी कल्पना से जोड़कर देखा। दूसरे यूजर ने कमेंट किया, "2169 मूवी वाला सीन याद आ गया।" तो वहीं तीसरे यूजर ने लिखा, "देगी नहीं बेचेगी।" ऐसे कई कमेंट्स सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। हालांकि, ये प्रतिक्रियाएं संबंधित यूजर्स की निजी राय हैं।

वायु प्रदूषण, हरित क्षेत्र में कमी और जलवायु परिवर्तन

शेखर सुमन का ये बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में वायु प्रदूषण, हरित क्षेत्र में कमी और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे लगातार सुर्खियों में हैं। विशेषज्ञ भी समय-समय पर चेतावनी देते रहे हैं कि यदि पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। एक्ट्रेस ने अपने बयान के जरिए सीधे किसी नीति और व्यक्ति का नाम नहीं लिया, बल्कि व्यंग्यात्मक अंदाज में ये संदेश देने की कोशिश की कि अगर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण नहीं किया गया, तो भविष्य में साफ हवा भी एक महंगी जरूरत बन सकती है।

सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर बहस अभी भी जारी है। कुछ लोग इसे एक जागरूकता फैलाने वाला संदेश मान रहे हैं, तो कुछ इसे महज एक व्यंग्य के तौर पर देख रहे हैं, लेकिन इतना तय है कि शेखर सुमन के इस बयान ने पर्यावरण और विकास के बीच बैलेंस को लेकर एक बार फिर चर्चा को तेज कर दिया है। आखिरकार सवाल सिर्फ आज की हवा का नहीं, बल्कि उस भविष्य का भी है जो आने वाली पीढ़ियों को विरासत में मिलने वाला है।