
Mithun Chakraborty Struggling Days: मिथुन चक्रवर्ती का स्टारडम तक का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। दिन में दो बार का खाना पाने के लिए, एक्टर फीस के बजाय पार्टियों में डांस करते थे। जहां कई लोग उन्हें अपनी पहली फिल्म 'मृगया' के तुरंत बाद नेशनल अवॉर्ड जीतने के लिए किस्मत वाला मानते थे, वहीं मिथुन के लिए यह एक लंबे संघर्ष की शुरुआत थी। ऐसे दिन भी थे जब वे फुटपाथ पर सोते थे और जिम के वॉशरूम का इस्तेमाल करने के बदले वहां सफाई करते थे। एक समय तो उन्होंने ऊटी में होटल चलाने के लिए बॉम्बे भी छोड़ दिया था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था।
हाल ही में जब फिल्ममेकर-कोरियोग्राफर फराह खान अपने फूड व्लॉग के लिए मुंबई में मिथुन चक्रवर्ती के घर गईं, तो उन्होंने अपनी जिंदगी के कई पहलुओं के बारे में बात की। उसी दौरान एक्टर के बारे में बात करते हुए फराह खान ने बताया, "जब मैं छोटी थी, तो मेरे अंकल के.के. शुक्ला अमिताभ बच्चन के लिए फिल्में लिखते थे। मिथुन दा उनकी पार्टियों में डांस करने आते थे, सिर्फ इसलिए ताकि उन्हें रात का खाना मिल सके।"
उन्होंने आगे कहा, "हम तब बहुत छोटे थे, वे कहते थे, मिथुन को घर ले आओ, लड़का अच्छा डांस करता है। वह आते थे, कोई फीस नहीं लेते थे, उन्हें अपनी परफॉर्मेंस के बदले वहां रात का खाना मिल जाता था। वह संघर्ष कुछ और ही था। बहुत से लोग यूं ही 'संघर्ष' शब्द का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन असली संघर्ष ऐसा होता है।"
फराह खान और मिथुन चक्रवर्ती ने इस बारे में भी बात की कि कैसे यह एक्टर होटल के बिजनेस में कदम रखने वाले शुरुआती स्टार्स में से एक थे। मिथुन ने बताया, "1994 में मैंने ऊटी में एक होटल शुरू किया था और अब बैंगलोर में भी मेरा एक होटल है।" फराह ने पूछा, "लेकिन आपने ऊटी में मोनार्क होटल क्यों शुरू किया?" मिथुन ने बताया, "वह ऐसा समय था जब मेरा करियर डगमगा रहा था। मेरी फिल्में बहुत अच्छा नहीं कर रही थीं। कुछ फिल्में चलीं, कुछ नहीं। मैं अपने करियर में गिरावट का सामना कर रहा था। मुझे डर था कि अगर इसके बाद एक एक्टर के तौर पर मेरा करियर खत्म हो गया, तो स्टारडम खत्म होने के बाद मुझे वापसी का मौका नहीं मिलेगा।"
उन्होंने आगे कहा, "तब तक मेरे तीन बच्चे हो चुके थे। मेरे पास कोई और विकल्प नहीं था। मैं नहीं चाहता था कि मेरे बच्चे वे चीजें देखें जो मैंने बड़े होते हुए देखी थीं। तभी पिंकी ने सुझाव दिया कि हमें अपना होटल चलाने के लिए ऊटी शिफ्ट हो जाना चाहिए। हमने तय किया कि अगर मैं अपनी मौजूदगी में होटल चलाऊंगा, तो लोग मेरे नाम की वजह से इसे बुक करेंगे और यह बहुत अच्छा चलेगा - और ऐसा ही हुआ। लेकिन जल्द ही मेरा करियर भी चल पड़ा।"
बातचीत के दौरान मिथुन ने कहा, "यह संघर्ष से भी कहीं बढ़कर है।" फराह ने बात आगे बढ़ाई, "बढ़कर इस मायने में कि वे सड़कों और फुटपाथ पर सोए हैं।" मिथुन ने याद करते हुए कहा, "मैं सड़कों और बगीचों में सोता था। कई बार चलते-चलते इतना थक जाता था कि फुटपाथ पर ही सो जाता था। जब आँख खुलती, तो खुद को फुटपाथ पर पाता था।"
बातचीत के दौरान, मिथुन ने काले रंग का बंदगला कोट और मफलर पहना हुआ था। उन्होंने इसके साथ काली पैंट, टोपी और स्टडेड जूते पहने थे। मिथुन के लुक को देखकर फराह ने कहा, "आप एक स्टाइल आइकन हैं।" उन्होंने आगे कहा, "उस समय लोग आपके और गोविंदा के कपड़ों के चुनाव का मज़ाक उड़ाते थे। लेकिन आज अगर आप देखें, तो वे सभी आप दोनों की नकल कर रहे हैं। न्यूयॉर्क फैशन वीक के लोगों से लेकर रणवीर सिंह और करण जौहर तक।" मिथुन की ओर इशारा करते हुए फराह ने कहा: "वह अपने समय से आगे थे। किसी का इस तरह मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए।"
घर घूमते हुए, फराह ने एक पीली बीटल कार की ओर इशारा किया और पूछा, "यह किसकी कार है? क्या आप लोग अभी भी इसे चलाते हैं या यह सिर्फ़ दिखाने के लिए है?" मिथुन के बेटे नमाशी ने बताया, "यह पापा का पहला घर है।" उन्होंने आगे कहा, "जब उन्होंने 1975 में FTII से पढ़ाई पूरी की और 1976 में उनकी पहली फिल्म आई। नेशनल अवॉर्ड जीतने के बावजूद, उनके पास कोई काम नहीं था। उनके पास घर नहीं था, इसलिए उन्होंने मुंबई में अपनी जिंदगी के 15 दिन इसी कार में बिताए।"
मिथुन के दूसरे बेटे, मिमोह ने बताया, "यह उनकी पहली कार थी। इसलिए वह अपनी कार में ही रहते और सोते थे।" जब उनसे पूछा गया कि वह बाथरूम का इस्तेमाल कैसे करते थे, तो उनके बेटों ने बताया कि वहां एक जिम था जहां मिथुन झाड़ू-पोछा करते थे, ताकि उन्हें वहां के शॉवर का इस्तेमाल करने दिया जाए। उन्होंने आगे कहा, "यह कार 50 साल पुरानी है। हमने इसे अच्छी तरह से संभाल कर रखा है।"
मिथुन ने बताया, "मैं किसी रोल के लिए कम से कम छह महीने तैयारी करता था, लेकिन शूटिंग एक महीने से भी कम समय में पूरी कर लेता था। एक साल में मेरी 19 फिल्में रिलीज हुई थीं। मैंने लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी अपना नाम दर्ज कराया है।"
मिथुन चक्रवर्ती ने 1976 की फिल्म 'मृगया' से अपने करियर की शुरुआत की, जिसके लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। हालांकि, उन्हें पहली बार कमर्शियल सफलता 1979 की फिल्म 'सुरक्षा' से मिली। बाद में, 1982 की फिल्म 'डिस्को डांसर' ने मिथुन चक्रवर्ती को 'डिस्को किंग' बना दिया और उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया। 1990 के दशक की शुरुआत में उनके करियर में गिरावट आने लगी, जिसके बाद एक्टर ने हॉस्पिटैलिटी बिजनेस समेत दूसरे क्षेत्रों में भी हाथ आजमाना शुरू किया।