
Supreme Court FIR cancellation: 'इंडियाज गॉट लेटेंट' विवाद में समय रैना और रणवीर इलाहाबादिया को बड़ी राहत मिली है। बार एंड बेंच के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को शो में की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़े समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज सभी FIR रद्द कर दीं। ये मामला 2025 में सोशल मीडिया और देशभर में काफी चर्चा में रहा था।
ये विवाद उस समय शुरू हुआ जब रणवीर इलाहाबादिया, समय रैना के शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में बतौर गेस्ट पहुंचे थे। शो के दौरान की गई कुछ टिप्पणियों को लेकर भारी विवाद हुआ था। इसके बाद कई राज्यों में शिकायतें और FIR दर्ज की गईं। इन मामलों में अश्लीलता को बढ़ावा देने और आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल करने जैसे आरोप लगाए गए थे।
इसके बाद रणवीर इलाहाबादिया ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने अलग-अलग जगहों पर दर्ज FIR को एक साथ करने और जबरन कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की थी। बता दें, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उनकी टिप्पणियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा था कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब ये नहीं है कि कोई सामाजिक मर्यादाओं का उल्लंघन करने वाली भाषा का इस्तेमाल कर सकता है। साथ ही, कोर्ट ने उन्हें अंतरिम सुरक्षा भी दी थी। जान से मारने की धमकियों की रिपोर्ट के बाद उन्हें पुलिस सुरक्षा लेने की अनुमति भी दी गई थी।
इस मामले की सुनवाई के दौरान समय रैना को भी सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी का सामना करना पड़ा था। मार्च 2025 में कनाडा में एक शो के दौरान अपने केस को लेकर मजाक करने के बाद कोर्ट ने उन्हें मामले की कार्यवाही पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी नहीं करने की चेतावनी दी थी। दरअसल, 3 मार्च 2025 को सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि कोर्ट को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। ये टिप्पणी रैना के उस मजाक के बाद आई थी, जिसमें उन्होंने कनाडा में दर्शकों से कहा था, "मेरे वकील की फीस देने के लिए धन्यवाद।"
इलाहाबादिया की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि पॉडकास्ट उनकी रोजी-रोटी का मुख्य जरिया है और उनके साथ काम करने वाले करीब 280 लोग इस काम पर निर्भर हैं। कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा भी बढ़ाई थी और उन्हें गुवाहाटी में जांच में शामिल होने का निर्देश दिया था। हालांकि, 14 जुलाई 2026 को मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। उस दौरान कोर्ट ने समय रैना और रणवीर इलाहाबादिया पर अपने पहले के निर्देशों का पालन नहीं करने के आरोपों को लेकर कड़ी नाराजगी जताई थी।
इतना ही नहीं, कोर्ट ने रैना और इलाहाबादिया को खुद को 'युवा आइकॉन' मानने वाले लोगों के तौर पर संबोधित करते हुए आदेशों के उल्लंघन पर चिंता जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने रैना और अन्य लोगों पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था और उन्हें दो हफ्ते के भीतर कंप्लायंस एफिडेविट दाखिल करने का समय दिया था।
कोर्ट ने समय रैना के रवैये पर भी सख्त टिप्पणी की थी और कहा था कि इस बात पर संदेह करने की कोई वजह नहीं है कि उन्होंने कोर्ट को गुमराह किया है। कोर्ट के मुताबिक, उन्होंने अदालत के सामने दिए गए बयानों और अंडरटेकिंग का खुले तौर पर उल्लंघन किया। बता दें, अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से इस विवाद में समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज FIR पर कानूनी कार्रवाई समाप्त हो गई है।