
Sanjay Mishra Best Characters: इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में कुछ कलाकार ऐसे हैं जिन्हें पर्दे पर देखते ही लगता है कि उनका यह किरदार कहीं न कहीं हमारी अपनी जिंदगी का हिस्सा है। 2026 में 72वें नेशनल अवार्ड्स में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का पुरस्कार जीत चुके संजय मिश्रा उन्हीं कलाकारों में से एक हैं। पर्दे पर उनके किरदारों की सबसे बड़ी खासियत है कि वो हमारे आसपास नजर आते हैं, जैसे छोटी नौकरी करने वाले, परिवार के लिए परेशान रहने वाले, अपनी गलतियों से जूझने वाले और कभी-कभी जिंदगी की मुश्किलों में भी हंसने की वजह ढूंढ लेने वाले।
आइए नजर डालते हैं उनके ऐसे ही कुछ चुनिंदा किरदारों पर।
‘ऑफिस ऑफिस’ में संजय मिश्रा ने शुक्ला का किरदार निभाया था। सरकारी दफ्तर की व्यवस्था, काम टालने की आदत और आम आदमी की परेशानियों के बीच उनका किरदार कॉमेडी के साथ सिस्टम पर भी तंज करता था। शुक्ला जैसे किरदार की खासियत यही थी कि वह पूरी तरह काल्पनिक नहीं लगता था। दर्शकों को उसमें अपने आसपास के किसी सरकारी कर्मचारी की झलक नजर आती थी।
‘मसान’ में संजय मिश्रा का किरदार उनकी एक्टिंग की गंभीरता दिखाता है। विद्याधर पाठक एक पिता हैं, जो अपनी बेटी की जिंदगी, समाज की सोच और अपनी परिस्थितियों के बीच फंसे हुए हैं। यह किरदार दिखाता है कि संजय मिश्रा बिना ज्यादा संवाद बोले भी भावनाएं दर्शकों तक पहुंचा सकते हैं। उनकी खामोशी और चेहरे पर दिखाई देने वाला तनाव इस भूमिका को बेहद असरदार बनाता है।
‘कड़वी हवा’ में संजय मिश्रा ने हेदू का किरदार निभाया था। यह एक ऐसे आम आदमी की कहानी है, जो जलवायु परिवर्तन और गरीबी जैसी बड़ी समस्याओं से सीधे प्रभावित होता है। हेदू किसी सुपरहीरो की तरह दुनिया नहीं बदलता। वह बस अपने परिवार और जिंदगी को बचाने की कोशिश करता है। यही बात उसे आम आदमी के बेहद करीब ले आती है।
‘दम लगा के हईशा’ में संजय मिश्रा का किरदार प्रेम त्रिपाठी भले ही फिल्म का मुख्य किरदार नहीं था, लेकिन उनकी मौजूदगी कहानी में देसी रंग भर देती है। उनका अंदाज छोटे शहरों के उन लोगों की याद दिलाता है, जिनकी बातचीत में तंज भी होता है और अपनापन भी। संजय मिश्रा ऐसे किरदारों को ओवरड्रामैटिक बनाने के बजाय सहज रखते हैं।
‘आंखों देखी’ जैसी फिल्म में संजय मिश्रा ने जिंदगी को अपने तरीके से देखने वाले एक साधारण इंसान को बेहद गहराई दी। उनका किरदार अचानक तय करता है कि वह वही मानेगा जो उसने खुद देखा और अनुभव किया है। यह किरदार आम आदमी की उस बेचैनी को सामने लाता है, जिसमें वह रोजमर्रा की जिंदगी से आगे निकलकर खुद से सवाल करने लगता है।
‘वध’ में संजय मिश्रा का किरदार एक आम आदमी की कहानी को सबसे गहराई से जुड़ता है। फिल्म में उनके किरदार का नाम शंभूनाथ मिश्रा है, जो एक साधारण स्कूल टीचर है और अपनी पत्नी के साथ शांत जिंदगी जी रहा है। लेकिन हालात उसे एक ऐसे फैसले तक पहुंचा देते हैं, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। इस किरदार की खास बात यह है कि वह एक डरा हुआ, परेशान और परिस्थितियों से टूट चुका आम आदमी है, जो अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है। इस किरदार को देखकर यही कहा जा सकता है कि संजय मिश्रा के आम आदमी वाले किरदार सिर्फ हंसाते नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी के संघर्ष और गुस्से को भी पर्दे पर उतनी ही मजबूती से दिखाते हैं।
‘शुभ मंगल सावधान’ में भी संजय मिश्रा की मौजूदगी कहानी को जमीन से जोड़ती है। उनके किरदारों में अक्सर छोटे शहरों की भाषा, परिवार की सोच और रिश्तों की उलझनें देखने को मिलती हैं। उनकी कॉमेडी इसलिए काम करती है क्योंकि वह सिर्फ मजाक पैदा करने के लिए नहीं होती। उसमें किरदार की अपनी सोच और सामाजिक माहौल भी शामिल होता है।
संजय मिश्रा की फिल्मों में ऐसे कई किरदार रहे हैं, जिनके पास कहने के लिए बहुत कुछ होता है, लेकिन वे उसे बड़े संवादों में नहीं कहते। यही उनकी एक्टिंग की खासियत है। वह किसी साधारण व्यक्ति की चाल, बोलने के तरीके और चुप्पी तक को कहानी का हिस्सा बना देते हैं।
संजय मिश्रा ने कई ऐसी फिल्मों में भी काम किया है, जहां उनका किरदार कहानी में हास्य लेकर आता है। लेकिन उनके कॉमिक किरदार भी सिर्फ मजाक तक सीमित नहीं रहते। उनकी बॉडी लैंग्वेज और डायलॉग बोलने का अंदाज उस किरदार को अलग पहचान देता है। यही वजह है कि कई बार फिल्म खत्म होने के बाद भी उनका किरदार दर्शकों को याद रहता है।
संजय मिश्रा ने फिल्मों के साथ-साथ वेब सीरीज में भी ऐसे किरदार निभाए हैं, जो आम जिंदगी और उसके संघर्षों से जुड़े नजर आते हैं। ‘कड़क सिंह’, ‘जहानाबाद: ऑफ लव एंड वॉर’, ‘गिल्टी माइंड्स’ और ‘काफस’ जैसे प्रोजेक्ट्स में उन्होंने अपनी एक्टिंग के अलग-अलग रंग दिखाए हैं। इन किरदारों में कहीं पिता की चिंता है, कहीं सिस्टम से जूझता इंसान और कहीं रिश्तों की उलझन। इसके अलावा 2026 में वो 'चिरैया' सीरीज में नजर आए थे, जिसमें उनका किरदार सुकुमार भ्रमर, समाज में अपनी इज्जत और साख बनाए रखने के लिए अपने बेटे की गलतियों को मानने से इंकार करता है।
संजय मिश्रा के किरदारों को याद रखने की सबसे बड़ी वजह यही है कि उनमें बनावटीपन कम और जिंदगी ज्यादा दिखाई देती है। वह ऐसे लोगों को पर्दे पर लेकर आते हैं, जिन्हें हम रोज देखते हैं लेकिन शायद उनकी कहानी पर ध्यान नहीं देते। कभी उनका किरदार हंसाता है, कभी परेशान करता है और कभी बिना कुछ कहे भावुक कर देता है। यही संजय मिश्रा की असली ताकत है, वह आम आदमी को सिर्फ कहानी का हिस्सा नहीं बनाते, बल्कि उसकी पूरी जिंदगी दर्शकों के सामने रख देते हैं। वर्कफ्रंट की बात करें तो संजय मिश्रा इस साल 'धमाल 4', और 'कर्तव्य' में नजर आए हैं।