
Shekhar Suman On Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर फिल्म और टीवी जगत से लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अब अभिनेता और टीवी होस्ट शेखर सुमन ने भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने अपने शो शेखर टुनाइट के शुरुआती मोनोलॉग में छात्रों पर हुई कार्रवाई को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि वो पिछले तीन दिनों से ठीक से सो नहीं पाए और सिर्फ रोते रहे। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर उन छात्रों की गलती क्या थी, जो अपने भविष्य और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे थे।
शेखर सुमन का ये बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उनके भावुक शब्दों ने एक बार फिर छात्र आंदोलन और उस पर हुई कार्रवाई को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है। अभिनेता ने कहा कि जब उन्होंने घायल और लहूलुहान छात्रों की तस्वीरें और वीडियो देखे तो उनका मन अंदर तक विचलित हो गया। उनके मुताबिक यह दृश्य किसी भी संवेदनशील इंसान को झकझोर देने वाला था।
अपने मोनोलॉग में शेखर सुमन ने कहा कि ये युवा सिर्फ अपने अधिकारों, अपने भविष्य और देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे। लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया गया। अभिनेता ने कहा कि किसी लोकतंत्र में युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उसे सुना जाना चाहिए, क्योंकि वही देश का भविष्य हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वह उन सभी युवाओं और लोगों के साथ खड़े हैं जो अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का साहस रखते हैं। उनके अनुसार देश की गरिमा तभी सुरक्षित रह सकती है जब नागरिकों की बात सुनी जाए।
अपने संबोधन के दौरान शेखर सुमन ने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि इतिहास हमेशा तब बदलता है, जब सत्ता अपने युवाओं की आवाज सुनना बंद कर देती है। उन्होंने कहा कि महाभारत केवल कुरुक्षेत्र में शुरू नहीं हुई थी, बल्कि उसकी शुरुआत उस समय हो गई थी जब हस्तिनापुर ने अपने ही युवाओं की बात को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया था।
उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जिन लोगों को कमजोर समझकर नजरअंदाज किया जाता है, वही आगे चलकर बड़े बदलाव की वजह बनते हैं। उन्हें दबाने की जितनी कोशिश की जाती है, वे उतनी ही मजबूती से वापस खड़े होते हैं।
शेखर सुमन ने कहा कि बदलाव की शुरुआत संसदों में नहीं होती, बल्कि उन घरों से होती है जहां मेहनत तो बहुत होती है लेकिन अवसर कम मिलते हैं। उन्होंने कहा कि जब एक पूरी पीढ़ी यह तय कर लेती है कि अब अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, तभी परिवर्तन की असली शुरुआत होती है।
उन्होंने यह भी बताया कि वह इस विषय पर बोलने को लेकर असमंजस में थे, लेकिन बाद में उन्हें लगा कि उनका शो लोगों की आवाज बनने का वादा करता है, इसलिए चुप रहना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि वह इस लड़ाई में छात्रों और युवाओं के साथ मजबूती से खड़े हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब शेखर सुमन ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े आंदोलन पर अपनी प्रतिक्रिया दी हो। इससे पहले भी उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन का समर्थन करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि अगर कोई व्यक्ति छात्रों के भविष्य और देश की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आंदोलन कर रहा है, तो उसकी बात गंभीरता से सुनी जानी चाहिए।
हाल के दिनों में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकार भी छात्रों के समर्थन में अपनी राय रख चुके हैं। सलमान खान, आलिया भट्ट, करीना कपूर खान, ऋतिक रोशन, वरुण धवन और नसीरुद्दीन शाह समेत कई कलाकारों ने छात्रों की मांगों पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। वहीं शेखर सुमन का भावुक बयान भी अब सोशल मीडिया पर चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।