
Shekhar Suman Takes Dig At Dharmendra Pradhan Resignation: देश में छात्रों के आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम पर अभिनेता और टीवी होस्ट शेखर सुमन ने अपने शो के दौरान तीखी प्रतिक्रिया दी। अपने खास व्यंग्यात्मक अंदाज में उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कई तंज कसे। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चले छात्र आंदोलन के बाद आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान ने पद छोड़ दिया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने आज की युवा पीढ़ी की दृढ़ता भी सामने ला दी।
शेखर सुमन ने अपने शो में व्यंग्य करते हुए कहा कि इतने दिनों तक छात्र लगातार संघर्ष करते रहे, लेकिन आखिर में मंत्री ही "पास" हो गए। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने जवाबदेही का पेपर पास कर लिया और इसी वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर शुरुआत में ही मंत्री पद छोड़ देते, तो शायद देश को कभी यह एहसास नहीं होता कि आज की युवा पीढ़ी कितनी मजबूत इरादों वाली है।
शेखर सुमन ने उन धारणाओं पर भी सवाल उठाया जिनमें अक्सर कहा जाता है कि आज के युवाओं में धैर्य की कमी है। उन्होंने कहा कि यही पीढ़ी लंबे समय तक आंदोलन में डटी रही। पुलिस की कार्रवाई, लाठीचार्ज और आंसू गैस जैसी परिस्थितियों के बावजूद छात्रों ने अपना विरोध जारी रखा।
उनके मुताबिक, जिस पीढ़ी को अक्सर यह कहकर आलोचना का सामना करना पड़ता है कि उसका ध्यान जल्दी भटक जाता है, उसी पीढ़ी ने लंबे समय तक अपने आंदोलन को जारी रखकर यह साबित किया कि वह अपने मुद्दों के लिए डटकर खड़ी रह सकती है।
शेखर सुमन ने धर्मेंद्र प्रधान के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने इसलिए इस्तीफा दिया ताकि "राष्ट्र विरोधी ताकतों को फायदा न हो।"
इस बयान पर व्यंग्य करते हुए शेखर सुमन ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने तो उन्हें भावुक कर दिया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि यदि उन्होंने वास्तव में राष्ट्र विरोधी ताकतों से देश की इतनी बड़ी रक्षा की है तो उन्हें केवल शिक्षा मंत्रालय ही नहीं बल्कि रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी सौंप देनी चाहिए।
शेखर सुमन यहीं नहीं रुके। उन्होंने इस्तीफे के बाद भाजपा नेताओं द्वारा धर्मेंद्र प्रधान की तारीफ किए जाने पर भी चुटकी ली। उन्होंने कहा कि किसी ने उन्हें त्यागी बताया, किसी ने बलिदानी, किसी ने आइकॉन और किसी ने इतिहास पुरुष तक कह दिया।
इस पर उन्होंने हास्यपूर्ण अंदाज में कहा कि शायद धर्मेंद्र प्रधान भी यही सोच रहे होंगे कि जितनी इज्जत उन्हें इस्तीफा देने के बाद मिली, उतनी मंत्री रहते हुए कभी नहीं मिली। अगर पहले इसका अंदाजा होता तो शायद वह पद छोड़ने में इतनी देर नहीं लगाते।
शेखर सुमन अपने राजनीतिक और सामाजिक व्यंग्य के लिए जाने जाते हैं। इस बार भी उन्होंने सीधे आरोप लगाने के बजाय हास्य और कटाक्ष के जरिए अपनी बात रखी। उनके बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और लोग इस पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
हालांकि, यह पूरा बयान एक व्यंग्यात्मक प्रस्तुति का हिस्सा था, जिसे उन्होंने अपने शो में दर्शकों के सामने रखा। राजनीतिक घटनाओं पर इस तरह की टिप्पणियां अक्सर चर्चा का विषय बन जाती हैं और इस बार भी ऐसा ही देखने को मिला।