
महेश भट्ट को फिल्म जख्म के लिए आशा पारेख ने दी थी सलाह (Photo Source- @Teamajaydevgn)
Mahesh Bhtt Zakhm Movie: बॉलीवुड के मशहूर फिल्ममेकर महेश भट्ट की चर्चित और भावनात्मक फिल्म ‘जख्म’ को रिलीज 28 साल बीत चुके हैं। लेकिन इस फिल्म को सिनेमाघरों तक पहुंचाने और सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए महेश भट्ट को जो पापड़ बेलने पड़े थे, उसका दर्द और कड़वाहट आज भी उनके मन में ताजा है। ‘अर्थ’, ‘डैडी’ और ‘वो लम्हे’ की तरह ही ‘जख्म’ भी महेश भट्ट की निजी जिंदगी और पहचान के संकट का एक बेहद संवेदनशील पन्ना थी, जिसमें एक मुस्लिम मां और हिंदू पिता की संतान होने का दर्द दिखाया गया था।
ये फिल्म जब बनकर तैयार हुई, तो इसे दर्शकों तक लाना एक बड़ी चुनौती बन गया था। उस दौरान देश में एनडीए (NDA) की सरकार थी। महेश भट्ट ने बताया कि फिल्म के संवेदनशील विषय को देखकर सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) इसे पास करने से हिचकिचा रहा था। महीनों तक फिल्म अटकी रही और यह मामला महज कानूनी न रहकर पूरी तरह से सियासी रंग लेने लगा था।
महेश भट्ट ने एक बातचीत में उस दौर का एक किस्सा शेयर किया है। उस समय मशहूर अभिनेत्री आशा पारेख सेंसर बोर्ड की प्रमुख थीं। महेश भट्ट ने याद करते हुए बताया, "आशा पारेख ने मुझे सलाह दी कि क्यों न हम यह फिल्म मुंबई में बाल ठाकरे जी या केंद्र में लालकृष्ण आडवाणी जी को दिखा दें और वहां से हरी झंडी ले लें। लेकिन मुझे यह बात बिल्कुल रास नहीं आई। मेरा मानना था कि फिल्मों का फैसला नियमों और तय कमेटी के आधार पर होना चाहिए, न कि नेताओं की निजी मंजूरी पर।"
महेश भट्ट को अपनी कला और फिल्म को बचाने के लिए मजबूरी में दिल्ली और गृह मंत्रालय के चक्कर काटने पड़े। लगभग 3 महीने तक लंबी बहस और बैठकों का दौर चला। आखिर में अपनी टीम की सलाह पर महेश भट्ट को कुछ कड़े समझौतों और कांट-छांट के लिए तैयार होना पड़ा। फिल्म को गृह मंत्रालय की निगरानी में दिखाया गया था। तीन महीने तक चले सियासी और कानूनी मंथन के बाद सर्टिफिकेट मिला था रिलीज के लिए मूल स्क्रिप्ट में कई जगह बदलाव भी करने पड़े थे।
हैरानी की बात यह है कि इतनी जद्दोजहद के बाद जब 'जख्म' सिनेमाघरों में आई, तो शुरुआत में यह बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं नहीं दिखा सकी। लेकिन वक्त के साथ इस फिल्म को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला और आज इसे भारतीय सिनेमा की एक 'कल्ट क्लासिक' फिल्म माना जाता है। अजय देवगन और पूजा भट्ट के शानदार अभिनय से सजी इस फिल्म के लिए कहा जाता है कि इसका बजट लगभग 4 करोड़ 60 लाख रुपये था और विश्व स्तर पर कुल 6.19 करोड़ की कमाई की थी। साथ ही राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी जीता था। महेश भट्ट का मानना है कि सेंसरशिप और फिल्मों में राजनीतिक दखल का जो मुद्दा उन्होंने दशकों पहले झेला था, वह आज भी फिल्म इंडस्ट्री के सामने उतना ही प्रासंगिक है।
Updated on:
01 Aug 2026 02:04 pm
Published on:
01 Aug 2026 02:04 pm
