
Vir Das X Post: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के बाद देशभर में इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। फिल्म और कॉमेडी जगत से जुड़े स्टार भी अपनी राय खुलकर सामने रख रहे हैं। इसी बीच एक्टर और कॉमेडियन वीर दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और इंस्टाग्राम पर कई पोस्ट शेयर किए। उन्होंने उन लोगों को भी संदेश दिया, जो अक्सर कहते हैं कि देश में कुछ भी नहीं बदल सकता।
वीर दास ने X पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़ी पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "दोस्तों" इसके बाद उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि रात तक टीवी चैनलों पर कई तरह की बहसें देखने को मिलेंगी, जहां लोग अपने पुराने बयानों से अलग रुख अपनाते नजर आएंगे। वीर दास ने तंज कसते हुए लिखा कि उन्हें उम्मीद है लोग "पैनकेक पसंद करेंगे", क्योंकि अब उन्हें बहुत सारी पलटियां देखने को मिलेंगी।
वीर दास ने अपने स्टैंड-अप शो का एक पुराना वीडियो भी दोबारा शेयर किया। इसके साथ उन्होंने लिखा, "नफरत चिल्लाकर कही जाती है, प्यार महसूस किया जाता है।" बता दें, वीडियो में वो कहते हैं कि नफरत की आवाज तेज होती है, लेकिन प्यार लंबे समय तक टिकता है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को कभी ये महसूस हो कि उसका देश नफरत में खो गया है, तो उसे उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए, क्योंकि प्यार की आवाज भले धीमी हो, लेकिन वो कमजोर नहीं होती और आखिरकार सुनाई देती है।
इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में वीर दास ने लोगों से बदलाव के इस पल का जश्न मनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि हर दफ्तर, परिवार, व्हाट्सऐप ग्रुप और दोस्तों के बीच ऐसा कोई न कोई व्यक्ति होता है जो हमेशा कहता है कि "कुछ नहीं होगा या भारत में ऐसा ही चलता है।" वीर ने ऐसे लोगों से कहा, "प्लीज, चुप हो जाओ। सिर्फ आज के लिए चुप हो जाओ।" उनका कहना था कि जब कोई बदलाव दिखाई दे, तो उसे एक्सेप्ट करना चाहिए और लगातार निराशा फैलाने से बचना चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान ने आज 25 जुलाई को अपने इस्तीफे की घोषणा की। हाल के दिनों में NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दों और छात्रों के विरोध प्रदर्शन ने इस मामले को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया था। इसी दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नाम से शुरू हुए एक सामाजिक आंदोलन ने भी शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और परीक्षा से प्रभावित छात्रों के लिए राहत की मांग उठाई। आंदोलन को उस समय और गति मिली जब एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को भूख हड़ताल के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया और 20 जुलाई को चलो संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की खबरें सामने आईं। इन घटनाओं के बाद विरोध प्रदर्शन कई शहरों तक फैल गए।