Neetu Kapoor parenting style: पति ऋषि कपूर की मौत के बाद नीतू कपूर ने पहली बार अपनी भावनाएं साझा कीं और खुलासा किया कि ऋषि कपूर अपनी बेटी रिद्धिमा के लिए महंगी चीजें क्यों नहीं दिलाते थे।
Neetu Kapoor parenting style: ऋषि कपूर की बेटी रिद्धिमा कपूर साहनी और मां नीतू ने हाल ही में खुलासा किया है कि फिल्मी परिवार में जन्म लेकर भी उन्हें और उनके भाई रणबीर कपूर को स्टार-किड वाली कोई खास सुविधाएं नहीं मिलीं, जिसपर उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता ने उन्हें प्यार भरा लेकिन अनुशासनपूर्ण बचपन दिया है, जिसमें हर चीज नॉर्मल तरीके से होती थी। साथ ही, रिद्धिमा ने कहा कि उनके स्कूल तक जाना कारपूल के जरिए होता था, उन्हें पॉकेट मनी भी फिक्स्ड मिलती थी और विदेश यात्रा भी बजट के अनुसार ही करनी होती थी।
नीतू कपूर ने इस बात की पुष्टि की कि रणबीर और रिद्धिमा बचपन में इकॉनमी क्लास में सफर करते थे ताकि वे पैसों की कीमत समझ सकें। उन्होंने कहा, "वे बच्चों को लग्जरी की आदत नहीं डालना चाहते थे। स्कूल के लिए कारपूल करते थे, ड्राइवर नहीं था और खर्च के लिए सीमित रकम मिलती थी। विदेश यात्रा के दौरान भी वे दोस्तों के साथ रहते और अपार्टमेंट शेयर करते थे।"
इसके साथ ही रिद्धिमा कपूर सहानी ने अपनी बातचीत को जारी रखते हुए बताया कि जब वे बड़े हो रहे थे, तो उनके माता-पिता ने दोनों बच्चों के लिए एक समान नियम बनाए रखे थे। उन्होंने कहा, "हमारा घर बहुत प्यार भरा था, लेकिन उसमें अनुशासन भी था। हमें कभी विशेष सुविधाएं नहीं दी गईं जिससे हमें महसूस हो कि हम किसी स्टार परिवार से हैं। हम सब कुछ खुद करते थे।"
नीतू कपूर ने आगे ये भी बताया कि ऋषि कपूर कभी भी रिद्धिमा के लिए महंगी चीजें खरीदने से बचते थे ताकि वो उन चीजों की कद्र कर सकें और ऋषि चाहते थे कि उनके बच्चे सामान्य बच्चों की तरह जीएं और आजाद रहें। उनकी यही परवरिश दोनों बच्चों की जिन्दगी में अब दिखती है।
तो वहीं, आलिया भट्ट के परिवार में भी ऐसा ही अनुशासन देखने को मिलता है। उनकी मां सोनी राजदान ने अपनी किताब 'रेजिंग स्टार्स: द चैलेंजेस एंड जॉयज ऑफ बीइंग ए बॉलीवुड पेरेंट' में बताया कि जब वे दुबई जा रहे थे, तो उनके पास 3 बिजनेस क्लास टिकट खरीदने के पैसे नहीं थे। इसलिए उन्होंने अपने बच्चों से कहा कि वे इकॉनमी क्लास में यात्रा करें जबकि वो खुद फर्स्ट क्लास में जाएंगी। ये उदाहरण भी दर्शाता है कि बॉलीवुड के नामी परिवारों में भी अपनी बच्चों को पैसों और सुविधाओं के प्रति जागरूक और स्वावलंबी बनाने के लिए सख्त नियम होते हैं।