आलू की दुर्दशा के लिए किसान केंद्र और प्रदेश सरकार को जिम्मेदार मान रहे हैं।
एटा। केंद्र और राज्य सरकार किसानों की खुशहाली के लिए तमाम योजनाएं चला रही हैं, लेकिन मेहनतकश किसान का दुख दूर नहीं हो रहा है। इस बार भी आलू किसान परेशान और आक्रोशित हैं। एक ओर भीषण सर्दी में पाला गिरने से आलू की खड़ी फसल बर्बाद हो रही है, वहीं दूसरी तरफ जो आलू खुद गया है, उसके दाम इतने कम मिल रहे हैं कि लागत भी नहीं निकल रही है। एटा के किसानों ने जो आलू कोल्ड स्टोरेज में जमा किया था, उसे भी नहीं निकाला। जिससे काफी मात्रा में आलू सड़ गया है।
दो रुपए किलो बिक रहा आलू
सीमांत किसान राजाराम का कहना है कि इस बार आलू की पैदावार अच्छी था, लेकिन हर बार की तरह कीमत किसानों को रुला रही है। जिससे वे परेशान हैं। दो रुपए किलो आलू बिक रहा है। कीमत इतनी कम है कि किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं। क्योंकि किसानों ने सारी जमापूंजी आलू की फसल में लगा दी थी। दिनरात मेहनत कर आलू की फसल तैयार की, लेकिन आलू की कीमत ने उनकी सारी उम्मीदें तोड़ दीं। राजाराम ने बताया कि तमाम किसानों ने तो आलू की फसल के लिए कर्ज लिया था। अब ऐसे में वे क्या करें।
अब नहीं करेंगे आलू की फसल
किसान सतीश ने अपने खेतों में आलू की फसल पैदा की। पैदावार देख उन्होंने सोचा था कि इस बार परिवार में खुशहाली आएगी। आलू की कीमत ने उन्हें भी मायूस कर दिया। वो खेतों में खड़ी आलू की फसल को खुदवाने में डर रहे हैं। क्योंकि आलू की खुदवाई के लिए उन्हें खुद की जेब से पैसे देने पड़ेंगे। ये सब सोचकर सतीश इतने मायूस हैं कि उन्होंने आगे से आलू की फसल न करने की कसम खा ली।
सरकार को बताया जिम्मेदार
आलू की दुर्दशा के लिए किसान केंद्र और प्रदेश सरकार को जिम्मेदार मान रहे हैं। उनका कहना है अगर समय रहते सरकारें इस ओर ध्यान देती तो किसान आज परेशान नहीं होते। उन्होंने मांग की है कि सरकार को आलू की कीमत निर्धारित करनी चाहिए। जिससे किसान और उसकी फसल की बेकदरी बंद हो सके।