नीलगिरी के पेड़ में आग लगने से सारे पेड़ जल गए
इटावा. उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के ऊसराहार इलाके के समथर गांव मे खेत में जलाए गए पुआल की आग से यूकेलिप्टस के बाग में आग लग गई। आग की चपेट में आकर साढ़े छह हजार पेड़ जल गए। छह बीघा के बाग में लगी आग से लगभग दस लाख रुपये के पेड़ जलने का अनुमान लगाया गया है।
पुआल में लगी आग की चिंगारी से हुई घटना
उसराहार थाना प्रभारी योगेंद्र शर्मा ने बताया कि ऊसराहार थाना क्षेत्र के समथर गांव में उस समय अफरा-तफरी मच गई। जब गांव के समीप गेहूं के खेत में पड़े पुआल में लगाई गई आग की चिंगारी समीप के यूकेलिप्टस के बाग तक पहुंच गई।
समथर निवासी अयूब खान ने अपने खेतों में गेहूं की कटाई कंपाइन मशीन से करवाई थी। इससे पूरे खेत में गेहूं निकलने के बाद लगभग पंद्रह बीघा जमीन पर पुआल पड़ा था। अयूब खां ने खेत में पड़े पुआल में आग लगा दी। कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते आग अयूब खान के खेत के पास इसी गांव के जगदीश कमल के बाग में जा पहुंची। जगदीश कमल के 6 बीघा खेत में 3 साल पहले यूकेलिप्टस के 6 हजार 500 पेड़ लगाए गए थे।
आग के कारण बाग से उड़ने लगीं लपटें
इस समय पेड़ों की लंबाई 10 फीट से 20 फीट तक हो चुकी थी। अचानक लगी आग से बाग में खड़े सभी पेड़ आग की चपेट में आ गए और पूरे बाग से धू-धू करके लपटें उठने लगीं। भयंकर आग देख ग्रामीण मौके पर पहुंचे और आग बुझाने लगे।
सारे पेड़ हो गए बर्बाद
घटना की सूचना पाकर थानाध्यक्ष योगेंद्र शर्मा और फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी मौके पर पहुंच गई। किसी तरह आग पर काबू तो पा लिया गया लेकिन बाग में खड़े सभी पेड़ जलकर बर्बाद हो गए। जगदीश ने बताया कि सभी पेड़ जल जाने से लगभग दस लाख रुपए का नुकसान हो गया है। वर्तमान समय में एक पेड़ की कीमत डेढ़ सौ रुपये से भी ज्यादा थी। आग की लपटों में जो पेड़ कुछ जलने के बाद बचे भी हैं, उनका भी अब कोई मोल नहीं है क्योंकि अब आधे जले पेड़ पनप नहीं सकते हैं।
खेतों में पड़े पुआल के जलने से प्रदूषित हो रहे वातावरण को लेकर शासन ने पहले से ही खेतों में पड़े पुआल को जलाने पर रोक लगा रखी है। इसके बाद भी खेत में पड़े पुआल को जला दिया गया जिससे किसान जगदीश कमल का बड़ा नुकसान हो गया।