भारतीय मूल के लोगों में अंग दान का स्तर कम होने के कारण हो रही मौतों पर एनएचएस की एक रिपोर्ट आई है। इसी को ध्यान में रखते हुए कानून में बदलाव की योजना है।
ब्रिटेन में भारतीय मूल के लोगों में अंग प्रतिरोपण की जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार ने अंगदान और ऊतक दान करने के बारे में कानून में बदलाव करने की योजनाओं की घोषणा की है। यह नई प्रणाली इंग्लैंड में 2020 से शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। इस योजना से वहां रह रहे लाखो एशियाई, अल्पसंख्यक जातीय समूह के लोगों को लाभ होगा। वे इसे जीवन-रक्षाक प्रतिरोपण के रूप में देख रहे हैं और इसके लागू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
ब्रिटेन की अवर विदेश मंत्री जैकी डोयल प्राइस ने मानसिक स्वास्थ्य एवं असमानता पर बोलते हुए कहा कि- भले ही अंगदान करना बेहद निजी मामला है और इसमें लोगों की निजी इच्छाएं बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनके अनुसार- इस नई प्रस्तावित सहमति प्रणाली के तहत वे लोग भी सरकार के वित्तपोषित राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) अंग दान रजिस्टर (ओडीआर) में अपना फैसला दर्ज करा सकेंगे, जो अंग दान नहीं करना चाहते हैं।
जानकारी के अनुसार- दरअसल भारतीय मूल के लोगों में अंग दान का स्तर कम होने की वजह से हुई कई मौतें हो जाती हैं। अवर विदेश मंत्री डोयल प्राइस के अनुसार- इस प्रणाली के तहत वे लोगों का बयान दर्ज कराना, उनके फैसले को दोस्तों, परिवारों और एनएचएस कर्मचारियों से साझा करना बेहद आसान बनाना चाहते हैं ताकि वे अपनी इच्छाओं को लेकर आत्मविश्वासी रह सकें।' उन्होंने कहा कि यह एक निजी मामला है। कोई अंगदान करना चाहता है या नहीं, उसका हमेशा सम्मान किया जाएगा।
बता दें, हाल ही में एनएचएस की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि ब्रिटेन में रह रहे भारतीय मूल के लोगों में अंगदान का स्तर कम होने की वजह से हुई मौतों पर सक्रिय रूप से कोई निर्णय लिया जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए यह घोषणा की गई है।