
राष्ट्रीय राजमार्ग-930 पर क्षमता से अधिक माल लेकर दौड़ रहे वाहनों के खिलाफ राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग रायपुर ने विशेष जांच अभियान चलाया। कार्यपालन अभियंता संतोष गुप्ता के नेतृत्व में दो दिनों में करीब 700 बड़े मालवाहक वाहनों की जांच की गई। इनमें ३० से ३5 प्रतिशत वाहन ओवरलोड पाए गए। अधिकारियों के अनुसार ओवरलोड वाहनों के कारण सड़क की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और समय से पहले मरम्मत की जरूरत पड़ रही है।
3 अक्टूबर को पथराटोला के पास विशेष नाका लगाकर ट्रक, डंपर, 10, 12 और 14 चक्का वाहनों के एक्सल लोड की जांच की गई। एसडीओ अनिल छारी, उप अभियंता पुष्पा धलेन्द्र और पुलिस टीम की मौजूदगी में वाहनों का वजन और एक्सल लोड दर्ज किया गया। अधिकारियों ने सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों और गड्ढों का भी निरीक्षण किया।
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अधिकारियों के मुताबिक बड़े मालवाहक वाहनों में करीब 49 से 55 टन तक वजन की अनुमति है। जांच के दौरान कई वाहन 70 से 75 टन तक माल लेकर चलते मिले। खनिज, सरिया, सीमेंट और गिट्टी से भरे डंपर अधिक ओवरलोड पाए गए। ये वाहन बालोद से रायपुर और धमतरी की ओर जा रहे थे।
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राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अनुसार आईआरसी के प्रावधानों के मुताबिक ओवरलोड वाहन सामान्य वाहन की तुलना में सड़क को कई गुना अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। अधिक भार से सड़क की ऊपरी परत दबने के साथ बेस कमजोर होता है और सड़क की आयु भी प्रभावित होती है। विभाग व्हीकल डैमेज फैक्टर का आकलन कर रिपोर्ट तैयार कर रहा है।
कार्यपालन अभियंता संतोष गुप्ता ने ओवरलोडिंग पर नियंत्रण के लिए संबंधित अमले को निर्देश दिए हैं। परिवहन और खनिज विभाग के साथ संयुक्त अभियान चलाकर नियम तोडऩे वाले वाहनों पर जुर्माना और अन्य कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर सड़क के आगामी मरम्मत और सुदृढ़ीकरण कार्य की योजना तैयार होगी