फर्रुखाबाद

अब इस जिले का नाम बदलने की मांग, बोलें- मुगलों की गुलामी का प्रतीक, कपिल या पंचाल नगर करने की मांग

Demand to change name of Farrukhabad फर्रुखाबाद का नाम बदलने की मांग को लेकर जिले में हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है। इधर रामनगरिया मेले में संतों ने पंचाल नगर या कंपिल नगर करने की मांग की है।‌
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रामनगरिया मेले में मौजूद रजनी तिवारी, फोटो सोर्स- 'X' रजनी तिवारी
फोटो सोर्स- 'X' रजनी तिवारी

Demand to change the name of Farrukhabad फर्रुखाबाद के पांचाल घाट पर रामनगरिया मेला चल रहा है। जिसमें बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। ऐसे में फर्रुखाबाद का नाम बदलने की मुहिम तेज हो गई है। संत शिव स्वरूप बच्चा स्वामी, महंत ईश्वर दास ब्रह्मचारी सहित हिंदू संगठनों ने मुगलों की गुलामी की निशानी के नाम को बदलने की मांग की है। संतों ने बताया कि रामनगरिया मेले में इस संबंध में मीटिंग होगी। इसके बाद एक ज्ञापन मुख्यमंत्री को दिया जाएगा। अंग्रेजों ने साजिश करके कंपिल शहर का नाम फर्रुखाबाद कर दिया था। यहां पर दुर्वासा ऋषि, पांडवों और शत्रुघ्न के द्वारा स्थापित शिवलिंग स्थापित है।

अंग्रेजों ने साजिश रच कर नाम बदला

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में शिव स्वरूप बच्चा स्वामी महाराज ने बताया कि फर्रुखाबाद का सनातनी इतिहास है। यहां पर राजा द्रुपद का राज रहा था। कंपिल में शत्रुघ्न ने शंकर जी की स्थापना की। यहां पर बड़े-बड़े शिवलिंग हैं, जिनमें दूर-दूर से लोग जल चढ़ाने के लिए आते हैं। यहीं पर श्रृंगी ऋषि का आश्रम भी है, जहां पर पांडवों ने भी अपना समय बिताया है। दुर्वासा ऋषि का आश्रम भी यहां पर मौजूद है, इसलिए फर्रुखाबाद का नाम बदलकर पंचाल नगर रखा जाए, जिसका नाम अंग्रेजों ने साजिश रच कर फर्रुखाबाद कर दिया।

फर्रुखाबाद का इतिहास हजारों वर्ष पुराना

महंत जूना अखाड़ा के महंत ने बताया कि फर्रुखाबाद का इतिहास बहुत पुराना है। पहले इसका नाम कपिल शहर था। बाद में अंग्रेजों ने इसे फर्रुखाबाद कर दिया। यहां पर राजा द्रुपद का राज था। यहीं पर श्रृंगी ऋषि और दुर्वासा ऋषि का आश्रम भी है। पांडवों ने भी यहां पर तपस्या की है और पांडेश्वर महादेव की स्थापना की।

मुख्यमंत्री को दिया जाएगा ज्ञापन

उन्होंने बताया कि नाम बदलने को लेकर यहां के जनप्रतिनिधियों से भी बातचीत हुई है कि फर्रुखाबाद का नाम कंपिल शहर या पंचाल नगर कर दिया जाए। यह बड़ा ही आध्यात्मिक शहर है और इसका नाम अजीबोगरीब है। रामनगरिया मेला में भी इस संबंध में बातचीत की जाएगी। सभी संतों को साथ लेकर नाम बदलने की मांग की जाएगी। मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भी दिया जाएगा।

हिंदू समाज पार्टी ने चलाया हस्ताक्षर अभियान

फर्रुखाबाद का नाम बदलने के लिए हिंदू समाज पार्टी ने हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने नाम बदलने को लेकर हस्ताक्षर किए हैं। प्रदेश अध्यक्ष अंकित तिवारी ने कहा कि देश को आजाद हुए 75 साल से अधिक हो गए हैं और मुगलों को आजादी मिले 200 वर्ष हो गए हैं। तो मुगल गुलामी के प्रतीक नाम को लेकर हम क्यों घूमें? यहां का इतिहास राजा द्रुपद, आचार्य द्रोणाचार्य और पांचाली से जुड़ा है। यहां का इतिहास पौराणिक, महाभारत कालीन, सतयुग और त्रेता युग से जुड़ा है। हजारों वर्ष पुराना हमारा इतिहास है। ऐसे में मुगल गुलामी के प्रतीक के रूप में नाम को लेकर हम क्यों घूम रहे हैं?

उच्च शिक्षा मंत्री भी पहुंची मेले में

उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने रामनगरिया मेला में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। इस दौरान वे स्वरूप शिव स्वरूप बच्चा स्वामी महाराज, महर्षि दुर्वासा आश्रम के महंत ईश्वर दास ब्रह्मचारी के आश्रम में पहुंचीं। उन्होंने मां गंगा के तट पर पांचाल घाट रामनगरिया मेला क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। ‌


Updated on:
22 Jan 2026 04:12 pm
Published on:
22 Jan 2026 04:12 pm