UP Crime: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में लापता मासूम का क्षत-विक्षत अस्थिपंजर घर के पास खेत में मिलने से कोहराम मच गया है।15 मीटर दूर पड़ी आंख और गायब अंगों के खौफनाक मंजर ने पुलिस को भी हैरत में डाल दिया है।
UP Crime: फतेहपुर जिले से एक खौफनाक खबर सामने आई है। इस खबर ने पुलिस प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। साथ ही पूरे इलाके में दहशत फैल गई है। किशनपुर थाना क्षेत्र के लोची का डेरा गांव से पांच दिन पहले एक बच्चे का अपहरण हो गया। साढ़े तीन वर्षीय मासूम अंकुश निषाद का अस्थिपंजर शनिवार सुबह घर से महज 25 मीटर की दूरी पर एक अरहर के खेत में बरामद हुआ। शव की हालत इतनी बदतर थी कि उसे देखकर पुलिसकर्मियों के भी रोंगटे खड़े हो गए।
अरहर के खेत में मिले मासूम के अस्थिपंजर से हैवानियत की इंतेहा साफ झलक रही थी। शव से कई महत्वपूर्ण अंग गायब थे। पुलिस को केवल एक पैर मिला। बाकी सीने की आधी हड्डियां और दोनों हाथ गायब थे। सिर पर बाल नहीं थे और गहरे घाव के निशान मौजूद थे। फॉरेंसिक टीम को करीब 15 मीटर दूर मासूम की एक आंख पड़ी हुई मिली। एसओजी और फॉरेंसिक टीम ने कुछ दूर पड़े बाल, खून से सनी मिट्टी और कपड़े साक्ष्य के तौर पर उठाए हैं। शरीर के अधिकांश हिस्से गायब होने के कारण शव को पहचानना भी मुश्किल हो रहा था। अपहरण से दो दिन पहले अंकुश की मां ने जो कपड़े पहनाए थे उससे और गले में बंधे काले धागे से उसकी शिनाख्त की गई।
शव मिलने की खबर से ही गांव में सनसनी फैल गई और आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाकर भारी हंगामा किया। सैकड़ों लोग लाठी-डंडा लेकर इकट्ठा हो गए और पुलिस को चारों ओर से घेर लिया। ग्रामीणों ने पुलिस को शव उठाने से रोक दिया और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इस दौरान एएसपी महेंद्र पाल सिंह और अन्य पुलिस कर्मियों से परिजनों और ग्रामीणों की तीखी नोकझोंक भी हुई। हालांकि एएसपी ने किसी तरह परिजनों को शांत कराया और दोपहर करीब 12 बजे फॉरेंसिक टीम की जांच के बाद अस्थिपंजर को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका।
मासूम की मौत की गुत्थी उलझ गई है। पिता हरिशंकर निषाद और ग्रामीणों ने हत्या कर शव फेंकने का आरोप लगाया है। शरीर के मिले हिस्सों को नोंचने जैसा प्रतीत होने के कारण एएसपी ने प्रथम दृष्टया जंगली जानवर के हमले से बच्चे की मौत होने की आशंका जताई है। हालांकि ग्रामीण इसे मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि पहले गांव में जंगली जानवरों का आना-जाना नहीं रहा है।
कुछ ग्रामीणों को इस खौफनाक घटना के पीछे तंत्र-मंत्र का भी गहरा शक है। ग्रामीणों ने बताया कि त्योहार के आसपास तांत्रिक बच्चों की बलि देने जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। जानबूझकर शव को जंगली जानवर को फेंक दिया गया होगा ताकि सबूत नष्ट हो जाएं। पूर्व की घटनाओं का हवाला देते हुए ग्रामीणों ने इस एंगल पर भी जांच की मांग की है।
अंकुश 24 फरवरी को अचानक गायब हुआ था। उसकी तलाश के लिए गांव से करीब 200 मीटर दूर बहने वाली ससुर खदेरी नदी में जाल डाला गया। एसडीआरएफ टीम और ड्रोन की मदद से खोजबीन की गई। किशनपुर थाने से प्रतिदिन 12 सिपाही और तीन दरोगा तलाश में जुटे थे। इसके बावजूद घर से महज 25 मीटर दूर खेत में शव मिलना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। इस घटना के बाद से पूरे गांव में दहशत का माहौल है और ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने तक बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं।