14 January 2026 Shattila Ekadashi : श्री राजेंद्र दास जी महाराज ने बताया कि 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति और षट्तिला एकादशी का 30-35 वर्षों बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है। जानें तिल स्नान, तिल दान, तर्पण, व्रत नियम, शुभ मुहूर्त और इस महासंयोग से मिलने वाले अक्षय पुण्य का महत्व।
Makar Sankranti and Shattila Ekadashi 2026 : श्री राजेंद्र दास जी महाराज ने बताया कि 14 जनवरी को षट तिला एकादशी है, और इस दिन तिल का बड़ा महत्व है। इस व्रत में तिल को छह अलग-अलग तरह से इस्तेमाल करते हैं। पहले तिल को पानी में भिगो लें, फिर उसे अच्छे से पीसें। अब, आजकल सिलोढ़ी तो हर घर में होती नहीं, तो मिक्सर में ही पीस लो। जैसे भी हो, तिल पीसकर नहा लो, ताकि शरीर और मन दोनों शुद्ध हो जाएं। फिर उसी तिल का उबटन पूरे शरीर पर लगाओ। इस उबटन को तीन हिस्सों में बांट लो—एक भाग माथे से छाती तक, दूसरा नाभि से कमर तक, और तीसरा पैरों पर लगा लो। इसके बाद, अगर हो सके, किसी तीर्थ में स्नान करो। या फिर, घर पर ही लोटे में तिल डालकर स्नान कर सकते हो। थोड़ा तिल गंगा या यमुना में छोड़ दो, फिर डुबकी लगा लो।
इसके अलावा, तिल से हवन करो और तिल हाथ में लेकर पितरों का तर्पण भी करो। देवताओं और ऋषियों का तर्पण भी तिल से ही करना चाहिए। वैसे तर्पण में तिल जरूरी होते ही हैं, लेकिन षट तिला एकादशी पर तिल का भोजन भी खास माना गया है। वैसे तिल सात तरह के अनाजों में गिने जाते हैं, लेकिन इस एकादशी पर तिल खाना और तिल का दान करना सबसे जरूरी है। बाकी एकादशियों पर तिल खाने का नियम नहीं है, लेकिन इस दिन जरूर है। तिल खाओ, तिल का भोजन बनाओ और तिल दान भी करो। कम से कम सवा सेर तिल और अगर संभव हो तो उसमें थोड़ा सोना डालकर, दक्षिणा के साथ किसी योग्य ब्राह्मण को दान देना चाहिए।
पुराणों में लिखा है कि भगवान यज्ञ वराह के पसीने से तिल की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए तिल को बहुत पवित्र मानते हैं। जब सूर्य मकर राशि में रहते हैं, तब रोज तिल का उबटन लगाकर स्नान करो। ऐसा करने से व्यक्ति वैकुंठ का अधिकारी हो जाता है, इतना पवित्र है तिल। अगर किसी के पास तिल नहीं है, बहुत गरीब है, तो भी ‘तिल-तिल’ बोलकर स्नान कर ले, तब भी उसे पुण्य मिल जाता है।
श्री राजेंद्र दास जी महाराज ने बताया कि इस बार खास बात ये है कि 30-35 साल में पहली बार षट तिला एकादशी और मकर संक्रांति एक ही दिन पड़ रही है। ये बड़ा दुर्लभ संयोग है, और इस दिन का पुण्य भी ज्यादा है। बहुत लोग पूछते हैं—महाराज, संक्रांति पर तो हम लोग अन्न दान करते हैं, अब क्या करें? तो, एकादशी होने की वजह से अन्न का दान न करके तिल का दान करो। जो अन्न दान करना है, उसका संकल्प कर लो और अगले दिन द्वादशी को दान कर देना। भोज भंडारा भी द्वादशी को ही कराओ। षट तिला एकादशी सारे पापों का नाश करती है, और मकर संक्रांति तो अक्षय पुण्य देती ही है।
14 जनवरी को करीब दोपहर 3:13 बजे से एकादशी और मकर संक्रांति का शुभ समय शुरू होगा, जो सूर्यास्त तक रहेगा। वैसे तो मकर संक्रांति पर समुद्र स्नान की विशेष महिमा है। अगर हो सके तो तापी-सिंधु संगम में स्नान करो, और नहीं तो सिर्फ समुद्र स्नान भी कर सकते हो।