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आरबीआई गर्वनर ने दिए संकेत, वाणिज्यिक बैंक और घटा सकते हैं ब्याज दर

फरवरी तक बैंक 0.69 फीसदी तक ब्याज दरों में का चुके हैं कटौती बाजार में तरलता बढऩे के कारण बैंक सस्ता कर रहे हैं कर्ज

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RBI Governor gave indication, commercial bank may reduce interest rate

नई दिल्ली।भारतीय रिजर्व बैंक ( आरबीआई ) के गवर्नर शक्तिकांता दास ने शनिवार को कहा कि केंद्रीय बैंक द्वारा पिछले साल नीतिगत ब्याज दरों में की गई कटौती का ज्यादा लाभ बैंक धीरे-धीरे ग्राहकों को दे रहे हैं तथा भविष्य में वाणिज्यक बैंकों की ब्याज दरों में और गिरावट की उम्मीद है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर की मौजूदगी में दास ने कहा कि नीतिगत दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों को देने के मामले में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। बैंकों की ओर से ऋण दरों में कटौती बढ़ी है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की दिसंबर में हुुई बैठक तक उन्होंने ब्याज दरों में औसतन 0.49 फीसदी की कटौती की थी जबकि फरवरी की बैठक तक यह कटौती बढ़कर 0.69 फीसदी पर पहुंच गई।

उन्होंने कहा कि भविष्य में ब्याज दरों में कटौती का यह क्रम जारी रहने की संभावना है। इससे पहले सीतारमण ने यहां केंद्रीय बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय मे? आरबीआई ई बोर्ड को संबोधित किया। हर साल बजट के बाद वित्त मंत्री केंद्रीय बैंक के बोर्ड को संबोधित करते हैं और विभिन्न वित्तीय मसलों पर चर्चा होती है।

दास ने कहा कि आरबीआई द्वारा पिछले साल ब्याज दरों की गई कटौती तथा बाजार में तरलता बढऩे के कारण बैंक कर्ज सस्ता कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति समिति ने महंगाई बढऩे की आशंका के मद्देनजर फरवरी में नीतिगत ब्याज दरें न घटाने का निर्णय किया था और जनवरी के महंगाई के आंकड़े कमोबेश उसके अनुमान के करीब हैं। यह पूछे जाने पर महंगाई को लेकर क्या रिजर्व बैंक की सरकार से कोई चर्चा हुई है, आरबीआई गवर्नर ने कहा कि फिलहाल रिजर्व बैंक आंतरिक तौर पर इस पर नजर बनाए हुए है तथा ''उचित समय पर सरकार के साथ इस संबंध में चर्चा की जाएगी।

मौद्रिक नीति संचालन के तहत खुदरा महंगाई दर दो फीसदी से 6 फीसदी के दायरे में रखने की जिम्मेदारी केंद्रीय बैंक को दी गई है। यदि महंगाई लगातार इस लक्ष्य से ऊपर रहती है तो आरबीआई को सरकार को लिखित जवाब देना होगा। पिछले साल सितंबर के बाद से ऋण उठाव में सुधार हुआ है। अक्टूबर 2019 से अब तक ऋण उठाव का आंकड़ा 6 लाख करोड़ रुपए बढ़कर 7.5 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है।

उन्होंने बताया कि इसमें निरंतर सुधार देखा जा रहा है। सिर्फ बैंकों से ही नहीं गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों तथा अन्य माध्यमों से भी ऋण उठाव बेहतर हुआ है। बैंकों के ऋण उठाव जहां तक प्रश्न है यह पिछले साल सितंबर तक इसमें 1.3 लाख करोड़ की कमी आई थी, जबकि यह अब बढ़कर 2.7 लाख करोड़ की वृद्धि में पहुंच गया है।

Published on:
16 Feb 2020 02:05 pm
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