
नई दिल्ली: Google ने Doodle बनाकर भारतीय सिनेमा के पितामह कहे जाने वाले दादासाहब फाल्के को आज उनके 148वें जन्मदिन पर याद किया है। दादासाहब फाल्के पर बने गूगल डूडल को कलाकार अलीशा नान्द्रा ने बनाया है। इसके साथ ही Google ने Doodle में युवा दादासाहब फाल्के को एक फिल्म रील के साथ ऐक्शन में दिखाया गया है।
Google ने आगे अपने ब्लॉक में लिखा है कि पेंटर, ड्राफ्ट्समैन, थिएट्रिकल सेट डिजाइनर और लीथोग्राफर के तौर पर अपना भाग्य आजमाने के बाद उन्हें एलिस गाय की साइलेंट फिल्म 'द लाइफ ऑफ क्राइस्ट' में मौका मिला। फाल्के को सिल्वर स्क्रीन पर भारतीय संस्कृति को दिखाने का श्रेय जाता है। फिल्ममेकिंग सीखने के लिए वह लंदन गए।
लंदन में दो हफ्ते रहने के बाद मुंबई लौटे और फिर यहां फाल्के फिल्म कंपनी की स्थापना की और अपने बैनर तले फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' बनाने का फैसला लिया। हालांकि यह सब उनके लिए इतना आसान नहीं था, क्योंकि इसके लिए फाइनेंसर नहीं मिला। इसके बाद दादा साहेब ने सोचा कि फिल्म में अभिनेत्री का किरदार कोई महिला निभाए, लेकिन इस काम के लिए कोई भी महिला तैयार नहीं हुई। किसी तरह इस फिल्म को तैयार किया गया, जिसमें फिल्म निर्माता, लेखक, कैमरामैन समेत सबकुछ दादासाहब ही थे। इस फिल्म के पूरा होने के बाद उन्होंने भस्मासुर मोहिनी और सावित्री दो अन्य फिल्में भी बनाई।
भारतीय सिनेमा में उनके अभूतपूर्व योगदान के चलते भारत सरकार ने 1969 से उनके सम्मान में 'दादा साहब फाल्के' अवार्ड की शुरुआत की, जिसे भारतीय सिनेमा का यह सर्वोच्च और प्रतिष्ठित पुरस्कार माना जाता है। इससे सबसे पहले देविका रानी चौधरी को फिर पृथ्वीराज कपूर को सम्मानित किया गया था।
बता दें कि दादा साहब फालके का जन्म 30 अप्रैल 1870 में त्र्यंबकेश्वर में हुआ और उनकी पढ़ाई मुंबई में पूरी हुई। दादासाहब फाल्के एक बेहतरीन प्रड्यूसर, डायरेक्टर और स्क्रीनराइटर थे। उन्होंने अपने 19 साल के करियर में 95 फिल्में और 27 शॉर्ट मूवी बनाई। इसके बाद 16 फरवरी 1944 को नाशिक में उनका निधन हो गया।