गरियाबंद

Leopard rescue operation: गरियाबंद में एक महीने से दहशत फैला रहा था तेंदुआ, वन विभाग की सतर्कता से टला बड़ा खतरा

Leopard Rescue Chhattisgarh: गरियाबंद के केरावाहारा गांव में पिछले एक महीने से दहशत फैला रहे तेंदुए को वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। केज ट्रैप और विशेष रेस्क्यू टीम की मदद से बड़ा हादसा टला।
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Aug 01, 2026
Leopard rescue operation
गरियाबंद के केरावाहारा में एक महीने से दहशत फैला रहा तेंदुआ सुरक्षित रेस्क्यू (photo AI Image)

Leopard captured in Gariaband: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में पिछले एक महीने से ग्रामीणों के लिए दहशत का कारण बना तेंदुआ आखिरकार वन विभाग के जाल में फंस गया। शुक्रवार सुबह वन विभाग ने सुनियोजित रणनीति और सतर्कता के साथ ग्राम केरावाहारा (ग्राम पंचायत जोवा) में लगाए गए केज ट्रैप (पिंजरे) के जरिए तेंदुए को सुरक्षित पकड़ लिया। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन से क्षेत्र में संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष का बड़ा खतरा टल गया।वन विभाग ने बताया कि तेंदुआ लगातार रिहायशी इलाकों में देखा जा रहा था। उसने कई बार पालतू मवेशियों पर हमला किया था और विद्यालय परिसर सहित आबादी के आसपास उसकी मौजूदगी से ग्रामीणों में भय का माहौल था।

वन मंत्री के निर्देश पर चला विशेष अभियान

वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार गरियाबंद वनमंडल की टीम ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया। तेंदुए की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी गई और उसे सुरक्षित पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। वन विभाग का उद्देश्य तेंदुए को किसी प्रकार की क्षति पहुंचाए बिना सुरक्षित रेस्क्यू करना और साथ ही ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। इसी रणनीति के तहत संवेदनशील क्षेत्रों में केज ट्रैप लगाए गए।

एक महीने से ग्रामीणों में थी दहशत

वन विभाग के अनुसार तेंदुआ पिछले एक महीने से अधिक समय से केरावाहारा और आसपास के क्षेत्रों में लगातार घूम रहा था। कई बार उसके रिहायशी इलाके में आने की सूचना मिली थी। तेंदुए ने क्षेत्र में पालतू पशुओं का शिकार भी किया था। इसके अलावा विद्यालय परिसर और आबादी वाले हिस्सों के पास उसकी मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद वन विभाग ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी थी।

केज ट्रैप और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की रणनीति रही सफल

वनमंडलाधिकारी ससिगानंदन के., उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप निदेशक वरुण जैन तथा वन्यप्राणी चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश वर्मा के नेतृत्व में ग्राम जोवा और केरावाहारा में रणनीतिक स्थानों पर केज ट्रैप लगाए गए। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित लेपर्ड रेस्क्यू टीम को आवश्यक उपकरणों के साथ मौके पर तैनात किया गया था। अभियान शुरू करने से पहले प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, छत्तीसगढ़ से आवश्यक अनुमति और दिशा-निर्देश भी प्राप्त किए गए थे।
वन विभाग की लगातार निगरानी और योजनाबद्ध कार्रवाई के चलते शुक्रवार सुबह तेंदुआ सुरक्षित रूप से पिंजरे में कैद हो गया।

स्वास्थ्य परीक्षण के बाद होगा अंतिम निर्णय

तेंदुए के पकड़े जाने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की। इसके बाद तीन सदस्यीय पशु चिकित्सक दल द्वारा तेंदुए का स्वास्थ्य परीक्षण शुरू किया गया। जांच के दौरान उसकी शारीरिक स्थिति, किसी संभावित चोट, बीमारी तथा प्राकृतिक आवास में छोड़ने की उपयुक्तता का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा। विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद वन्यजीव संरक्षण के नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मौके पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम

तेंदुए के पकड़े जाने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचने लगे। भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए वन विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था भी की। अधिकारियों ने लोगों से तेंदुए के पास न जाने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की।

ग्रामीणों से अफवाहों से बचने की अपील

वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे तेंदुए से जुड़ी किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें। यदि किसी क्षेत्र में वन्यजीव दिखाई देता है तो तत्काल निकटतम वन कार्यालय या वन अमले को सूचना दें। विभाग ने स्पष्ट किया कि मानव जीवन और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। भविष्य में भी ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोका जा सके। इस सफल रेस्क्यू अभियान से न केवल केरावाहारा और आसपास के गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है, बल्कि वन विभाग की तत्परता और योजनाबद्ध कार्रवाई की भी सराहना की जा रही है।


Updated on:
01 Aug 2026 05:03 pm
Published on:
01 Aug 2026 05:02 pm
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