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जतमई-घटारानी जलप्रपात जाने वाले ध्यान दें, पहली ही बारिश में धंसी पुल की एप्रोच रोड, सुरक्षा को लेकर उठे सवाल

Jatmai Waterfall: जतमई-घटारानी जलप्रपात जाने वाले पर्यटकों के लिए जरूरी खबर। पहली ही बारिश में पुल की एप्रोच रोड धंस गई है, जिससे सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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Jatmai Ghatarani Road

जतमई घटारानी मार्ग पर बारिश में धंसी एप्रोच रोड (photo Patrika)

Jatmai Ghatarani Road: जतमई-घटारानी पर्यटन मार्ग पर स्थित जरगांव के बहुप्रतीक्षित घुनघुटी नाला पुल और उसकी एप्रोच सडक़ की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पहली ही बारिश में एप्रोच रोड के धंसने, सडक़ किनारों पर मिट्टी के कटाव और साइड पिचिंग में दरारें आने की खबरें समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी और लोक निर्माण विभाग ने तकनीकी सुधार करने के बजाय जल्दबाजी में बजरी और सीमेंट का गारा डालकर इन खामियों को छिपाने का प्रयास किया है।

पहली ही बारिश ने निर्माण की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न

जानकारी के अनुसार, घुनघुटी नाला पुल का निर्माण छत्तीसगढ़ लोक निर्माण विभाग के सेतु निर्माण संभाग द्वारा लगभग 3 करोड़ 91 लाख 75 हजार रुपए की लागत से कराया गया है। वर्ष 2021 में शुरू हुआ यह निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा से काफी विलंब के बाद वर्ष 2026 में पूरा हुआ। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि चार वर्षों के लंबे इंतजार के बाद उन्हें एक मजबूत और टिकाऊ पुल मिलेगा, जिससे बरसात में नाला बढऩे पर आवागमन बाधित होने की समस्या से मुक्ति मिलेगी। लेकिन पहली ही बारिश ने निर्माण की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

पैचवर्क से नहीं होगा स्थायी समाधान जांच की मांग

मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि मानसून के शुरुआती दौर में ही जब यह स्थिति है, तो जुलाई से सितंबर के बीच होने वाली भारी बारिश के दौरान नुकसान और बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभाग ने किसी तकनीकी निरीक्षण के बिना केवल ऊपर-ऊपर से पैचवर्क कर दिया, जिससे वास्तविक समस्या जस की तस बनी हुई है।

जतमई माता एवं घटारानी जलप्रपात पहुंचने का मुख्य मार्ग

छुरा से जतमई-घटारानी मार्ग केवल स्थानीय ग्रामीणों के आवागमन का साधन नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख पर्यटन मार्ग भी है। सालभर में हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इसी रास्ते से जतमई माता एवं घटारानी जलप्रपात पहुंचते हैं। ऐसे में इस पुल और सडक़ की जर्जर स्थिति क्षेत्रीय पर्यटन, सुरक्षा और विकास के दृष्टिकोण से एक बड़ा खतरा साबित हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ गारा-बजरी डालकर लीपापोती करने से काम नहीं चलेगा; अगर तकनीकी कमियों को स्थायी रूप से दूर नहीं किया गया, तो आने वाले समय में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।