
गरियाबंद में बारिश का कहर (photo source- Patrika)
Bridge Collapse: गरियाबंद जिले के छुरा और फिंगेश्वर तहसील क्षेत्र में पिछले 24 घंटे से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारी बारिश के कारण छुरा-कुसमी मार्ग पर बरसाती नाले पर बना कोसुमबूड़ा पुल टूट गया, जिससे आसपास के 10 से अधिक गांवों का छुरा मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट गया है। पुल टूटने के बाद ग्रामीणों की आवाजाही बंद हो गई है और दैनिक जरूरतों के लिए भी लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, कोसुमबूड़ा पुल का निर्माण कई वर्ष पहले बरसाती नाले पर किया गया था। लगातार हो रही बारिश के चलते नाले का जलस्तर तेजी से बढ़ा और तेज बहाव के कारण पुल क्षतिग्रस्त होकर टूट गया। पुल के ध्वस्त होते ही छुरा-कुसमी मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बंद हो गया।
इस घटना के बाद नवापारा, सारागांव, दुल्ला, चुरकीदादर, बम्हनी सहित आसपास के 10 से अधिक गांवों के लोगों का मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। अब ग्रामीणों को अस्पताल, बाजार, बैंक, स्कूल, शासकीय कार्यालय और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कोसुमबूड़ा पुल लंबे समय से जर्जर स्थिति में था। पुल की हालत को देखते हुए कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पुराने पुल को हटाकर नया और मजबूत पुल बनाने की मांग की गई थी। लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते नए पुल का निर्माण शुरू कर दिया जाता, तो आज इतनी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। उनका कहना है कि बरसात शुरू होने से पहले ही पुल की मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया जाना चाहिए था।
लगातार हो रही बारिश का असर केवल सड़क और पुलों तक ही सीमित नहीं है। छुरा और फिंगेश्वर क्षेत्र के कई गांवों में बारिश का पानी घरों तक पहुंच गया है। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है, जिससे लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो गया है।
कई परिवारों को घरों से पानी निकालने में मशक्कत करनी पड़ रही है। वहीं खेतों और कच्चे मकानों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। लगातार बारिश के कारण कई ग्रामीण मार्ग भी कीचड़ और पानी से भर गए हैं, जिससे आवागमन और अधिक मुश्किल हो गया है।
पुल टूटने के बाद सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीणों को दैनिक जरूरतों के लिए हो रही है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, विद्यार्थियों के स्कूल जाने, किसानों को कृषि कार्य और लोगों को बाजार तक पहुंचने में दिक्कतें आ रही हैं। यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रही और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द अस्थायी वैकल्पिक मार्ग तैयार करने और नए पुल के निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
जिला प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से लोगों से अनावश्यक यात्रा नहीं करने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की गई है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि केवल निगरानी पर्याप्त नहीं है। संपर्क बहाल करने और लोगों की परेशानियों को कम करने के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था और राहत कार्य शुरू किए जाने की आवश्यकता है।
कोसुमबूड़ा पुल का टूटना केवल एक पुल का क्षतिग्रस्त होना नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। हर वर्ष बरसात के दौरान ऐसे हालात सामने आते हैं, जब पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त होने से गांवों का संपर्क मुख्यालय से टूट जाता है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मरम्मत के बजाय दीर्घकालिक और मजबूत निर्माण पर ध्यान देने की जरूरत है, ताकि हर मानसून में ग्रामीणों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
Updated on:
05 Jul 2026 03:47 pm
Published on:
05 Jul 2026 03:47 pm
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