Elephant Tusk Case: उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया। 4 साल से दीवार में छिपाकर रखा हाथी दांत और शिकार के उपकरण जब्त किए गए।
Elephant Tusk Case: Gariaband जिले के Udanti Sitanadi Tiger Reserve में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एंटीपोचिंग टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से एक कीमती जंगली हाथी का दांत और शिकार में इस्तेमाल होने वाले कई आधुनिक व पारंपरिक उपकरण बरामद किए गए हैं।
वन विभाग के अनुसार यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिली थी कि कुल्हाड़ीघाट निवासी पदमन के पास हाथी का दांत छिपाकर रखा गया है। इसके बाद सहायक संचालक के निर्देश पर टीम ने वनक्षेत्रपाल के नेतृत्व में आरोपी के घर और बाड़ी की तलाशी ली। तलाशी के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी ने हाथी के दांत को पिछले चार साल से अपने घर की दीवार में छिपाकर रखा था।
गिरफ्तार आरोपियों में पुसऊराम नाम का व्यक्ति भी शामिल है, जो पहले से ही शिकार के मामलों में संलिप्त रहा है। वह इसी साल दडईपानी क्षेत्र में सांभर शिकार के मामले में आरोपी था और फिलहाल जमानत पर बाहर था। जमानत पर रहते हुए दोबारा वन्यजीव अपराध में शामिल होना विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
वन विभाग की टीम ने आरोपियों के पास से कई आपत्तिजनक सामान बरामद किए हैं, जिनमें शामिल हैं: ठोस अवस्था में हाथी का दांत, 2 धनुष और 12 तीर, पक्षी शिकार के लिए विशेष धनुष, जंगली सुअर का दांत और बाल, 2 गुलेल और अन्य उपकरण शामिल हैं। यह सामग्री संकेत देती है कि आरोपी लंबे समय से शिकार और तस्करी में सक्रिय थे।
पूछताछ में एक और अहम जानकारी सामने आई। आरोपी सुखचंद ने बताया कि यह हाथी दांत उसे वर्ष 2021 में सिहार निवासी गंगाराम से मिला था। गौरतलब है कि गंगाराम की मौत सितंबर 2022 में हाथी-मानव संघर्ष के दौरान हुई थी।
हालांकि आरोपियों का दावा है कि दांत खेत में पड़ा मिला था, लेकिन वन विभाग इस पर संदेह जता रहा है। मामले की सच्चाई जानने के लिए दांत का सैंपल Wildlife Institute of India, देहरादून भेजा जा रहा है, जहां डीएनए जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि यह दांत किस हाथी का है और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई।