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Chhattisgarh Politics: “कलेक्टर साहब फोन तो उठाइए…” बीजेपी नेता का मंच से फूटा गुस्सा

Chhattisgarh Politics: गरियाबंद जिले के अमलीपदर में आयोजित सुशासन तिहार शिविर के दौरान पूर्व भाजपा संसदीय सचिव गोवर्धन मांझी ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

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वरिष्ठ नेता गोवर्धन मांझी मंच (photo source- Patrika)

वरिष्ठ नेता गोवर्धन मांझी मंच (photo source- Patrika)

Chhattisgarh Politics: गरियाबंद जिले के अमलीपदर तहसील मुख्यालय में आयोजित सुशासन तिहार शिविर के दौरान उस समय माहौल गर्म हो गया, जब पूर्व भाजपा संसदीय सचिव और क्षेत्र के वरिष्ठ नेता गोवर्धन मांझी ने मंच से ही प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर कर दी। कार्यक्रम में जिला कलेक्टर भगवान सिंह उइके समेत कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे, लेकिन मांझी ने अधिकारियों की कार्यशैली और जनता की समस्याओं को लेकर खुलकर सवाल उठाए।

Chhattisgarh Politics: “अधिकारी फोन तक नहीं उठाते” - गोवर्धन मांझी

अपने संबोधन के दौरान गोवर्धन मांझी ने कहा कि क्षेत्र की जनता पानी, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर लगातार जनप्रतिनिधियों के पास पहुंचती है। जनप्रतिनिधि इन समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कई बार अधिकारी फोन तक रिसीव नहीं करते, जिससे छोटी-छोटी समस्याएं भी लंबे समय तक बनी रहती हैं। “कलेक्टर साहब, आप फोन तो उठा लिया करें। छोटी-मोटी समस्याओं का समाधान ऐसे ही हो जाता है। लोग आवेदन देकर थक चुके हैं, लेकिन अधिकारियों तक सुनवाई नहीं होती।”

“सिर्फ शिविर लगाने से समस्याएं खत्म नहीं होंगी”

गोवर्धन मांझी ने कहा कि सुशासन तिहार जैसे शिविर सरकार की अच्छी पहल हो सकते हैं, लेकिन केवल शिविर आयोजित कर देने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा,“शिविर कोई जादू की छड़ी नहीं है कि सारी समस्याएं तुरंत खत्म हो जाएं। सरकार की मंशा अच्छी हो सकती है, लेकिन अगर जमीनी स्तर पर अधिकारी गंभीर नहीं होंगे तो जनता को राहत नहीं मिलेगी।”

खाली कुर्सियों पर भी उठाए सवाल

कार्यक्रम के दौरान पंडाल में बड़ी संख्या में खाली कुर्सियां दिखाई देने पर भी मांझी ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह प्रशासन की कमजोर तैयारी और प्रचार-प्रसार की कमी को दर्शाता है। उनके मुताबिक, यदि लोगों को शिविर की सही जानकारी और भरोसा होता तो बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां पहुंचते। उन्होंने कहा कि खाली पंडाल यह संकेत देता है कि प्रशासन सरकार की योजनाओं और मंशा को गंभीरता से लागू करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पा रहा है।

जनता की समस्याओं पर गंभीरता की जरूरत

पूर्व संसदीय सचिव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पेयजल, बिजली, सड़क और राजस्व से जुड़े कई मामले लंबित पड़े हुए हैं। लोग महीनों तक कार्यालयों के चक्कर काटते रहते हैं, लेकिन समाधान नहीं मिल पाता। ऐसे में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बेहतर संवाद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देने और जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाकर काम करने की अपील भी की।

Chhattisgarh Politics: शिविर में मौजूद रहे प्रशासनिक अधिकारी

सुशासन तिहार शिविर में जिला कलेक्टर भगवान सिंह उइके के अलावा अन्य विभागीय अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। हालांकि गोवर्धन मांझी के बयान के बाद कार्यक्रम में कुछ समय के लिए माहौल चर्चा का विषय बन गया।